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International News विदेश सचिव मिसरी ने अमेरिकी विदेश मंत्री और एफबीआई चीफ से की मुलाकात

रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी…

वाशिंगटन डी.सी.। अमेरिका के दौरे पर गए भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा और क्वाड फ्रेमवर्क पर चर्चा हुई। बैठक के बाद यह घोषणा की गई है कि अमेरिकी विदेश मंत्री अगले महीने भारत का दौरा करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, जो इस बैठक में मौजूद थे, उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा व्हाइट हाउस में विक्रम मिसरी का स्वागत है। मार्को रुबियो के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमारे द्विपक्षीय संबंधों, खासकर व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और क्वाड पर चर्चा हुई।

इसके अलावा मिसरी ने अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई चीफ काश पटेल समेत अमेरिका के कई सीनियर अधिकारियों के साथ अलग से मुलाकात की। विदेश सचिव ने पटेल के साथ मुलाकात के दौरान आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के प्रयासों पर चर्चा की।  इसके अलावा उन्होंने पेंटागन में रक्षा उप-सचिव एलब्रिज कोल्बी और अन्य रक्षा अधिकारियों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर भी बातचीत की। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग में राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हुकर से मुलाकात कर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार साझा किए। व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए उन्होंने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों, जेफरी केसलर और विलियम किममिट के साथ भी बैठकें कीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वाशिंगटन डी.सी. के रणनीतिक समुदाय के प्रमुख विचारकों के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर चर्चा की। उन्होंने मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक ऊर्जा, खाद्य तथा आर्थिक सुरक्षा पर उनके प्रभावों पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार 8–10 अप्रैल तक की यह यात्रा फरवरी 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अमेरिका दौरे के बाद हो रही है, जो दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद का हिस्सा है। बयान में कहा गया है इस दौरे से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा करने और प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

 

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