एनसीपीआई में शामिल होने के लिए स्पीकर से मिले टीएमसी के बागी सांसद
बागियों की सदस्यता रद्द करने के लिए टीएमसी ने दिया पत्र, टीएमसी सांसद सागरिका घोष और सांसद कीर्ति आजाद से नहीं मिले स्पीकर, पश्चिम बंगाल में टीएमसी के हारने के बाद ही भाजपा ने शुरू की साजिश!
कानपुर। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री व टीएमसी की तेजतर्रार नेता ममता बनर्जी के चुनाव हारते ही भाजपा ने पार्टी तोड़ने की साजिश शुरू कर दी। ईडी, सीबीआई, सीआईडी और पुलिस ने टीएमसी विधायकों और सांसदों को घेरना शुरू कर दिया। इससे भयभीत कई सांसद और विधायक पाला बदलने में लग गए। कई राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया। रविवार को तेजी से घटनाक्रम बदला और पहले सांसद सागरिका घोष और सांसद कीर्ति आजाद लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी देने पहुंच गए लेकिन वह नहीं मिले। इस पर को उनके दफ्तर में चिट्ठी रिसीव कराकर लौटना पड़ा। इसके बाद असंतुष्ट गुट पहुंचा तो लोकसभा स्पीकर ओम बिलड़ा उनसे मिलने आ गए। टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी आफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के लिए पत्र दिया है। इस पर राजनीतिक बहस फिर छिड़ गई है। सांसदों और विधायकों में नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं रही है।
टीएमसी के बंगाल में हारते ही उसे तोड़ने के लिए भाजपा ने सारी एजेंसियों को लगा दिया था। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के घर छापे पड़ने लगे तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हो गई। जेल जाने से डरे सांसदों ने टीएमसी से बगावत शुरू कर दी। एक महीने से टीएमसी टूटने की अटकलें चलती रहीं। टीएमसी के बागियों की बैठकें नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव के घर पर हुई।
रविवार को बागियों के नई दिल्ली पहुंचते ही टीएमसी के सांसद भी सक्रिय हो गए। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और सांसद कीर्ति आजाद बागियों को मान्यता न देने की चिट्ठी लेकर लोकसभा स्पीकर के घर पहुंच गए। उनसे मिलने का समय मांगा लेकिन नहीं मिले। इस पर दोनों सांसद अन्य नेताओं के साथ चिट्ठी उनके दफ्तर में रिसीव कराकर लौट आए।
उनके जाने के आधा घंटे के बाद ही टीएमसी के बागी सांसद लोकसभा स्पीकर से मिलने के लिए पहुंच गए। उनको चिट्ठी देकर एनसीपीआई में शामिल होने की इच्छा जता दी। इस पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। भाजपा साम, दाम, दंड और भेद से विरोधी पार्टियों को तोड़ने में लगी है। लोकसभा स्पीकर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए जाते हैं। अब देखना होगा कि इस पर उनका फैसला क्या होगा? इस मुद्दे पर सांसद सागरिका घोष और बागी गुट की नेता डा. काकोली दस्तीदार के बीच एक्स पर बहस भी छिड़ गई।
अपमानजनक और बेहद अवसरवादी तमाशाः सागरिका
सांसद सागरिका ने इसके पीछे गृहमंत्री अमित शाह का हाथ बताया है। उन्होंने कहा कि आज का दिन बहुत खराब है जो टीएमसी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े और अब भाजपा में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा से ठुकराए जाने पर गुमनाम पार्टी की शरण में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह राजनीति का सबसे घटिया, दुखद, अपमानजनक और बेहद अवसरवादी तमाशा बताया है।
बागी गुट में यूसुफ को देखकर चौके लोग
पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी के सांसद यूसुफ पठान के भी बागी गुट में शामिल होने पर सबसे ज्यादा बहस छिड़ गई है। टीएमसी की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि वह तो सभासदी का चुनाव भी नहीं जीत सकते हैं। पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने उनको सांसद बनने का मौका दिया। अब वह भी गद्दारी कर रहे हैं।



