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ईरान और तुर्किए के साथ इस्लामिक देश बनाएंगे अपना नाटो

ईरान और तुर्किए के साथ इस्लामिक देश बनाएंगे अपना नाटो ईरान पर इस्राइल और अमेरिका के हमले के बाद अरब देशों में बढ़ी चिंता, ईरान की बढ़ी ताकत से एकजुट हो रहे हैं इस्लामिक देश, सुरक्षा का भरोसा देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री ने किया यूएई, कुवैत, बहरीन का दौरा, ईरानी राष्ट्रपति बोले, देश ताकतवर न होता तो गाजा जैसा हमारा हश्र, सभी मुस्लिम देशों के दिया एकजुट होने का संदेश

रान ने एक बार फिर अपनी ताकत पूरी दुनिया को दिखा दी है कि उस पर हमला करने वालों का अंजाम इस्राइल और अमेरिका की तरह होगा। म
ओमाल-में-सुलतान-तारिक-अल-सईद-से-बातचीत-करते-ईरान-के-स्पीकर-और-विदेश-मंत्री।

ओमाल-में-सुलतान-तारिक-अल-सईद-से-बातचीत-करते-ईरान-के-स्पीकर-और-विदेश-मंत्री।
ध्य एशिया यानि मुख्य रूप से अरब देशों की तरह अगर ईरान भी सुरक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता तो आज उसकी स्थिति भी फिलिस्तीन के गाजा की तरह होती लेकिन ईरान ने सारी पाबंदियों के बाद भी उच्च स्तरीय मिसाइल और ड्रोन का निर्माण किया। इसके नतीजे यह रहे कि युद्ध में बेहद सुरक्षित माने जाने वाले आयरन डोम भी ईरानी बैलेस्टिक मिसाइलों के आगे धराशायी हो गए। अमेरिकी सैनिक अड्डों को भी ईरान ने अपनी मिसाइलों से तबाह कर दिया। अमेरिका के दर्जनों लड़ाकू विमान जमीदोज हो गए।

28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने यह समझ कर ईरान पर हमला बोला था कि दो-चार दिन में सारी लीडरशिप को मारकर ईरान पर कब्जा कर वेनुजएला की तरह अपनी पिट्ठू सरकार बनवा देंगे लेकिन ईरान ने बेहद संजीदगी और बेहतर रणनीति का इस्तेमाल करते हुए इस्राइल और अमेरिका को कड़ा जवाब दिया। उसके साथ मजबूती से रूस और चीन खड़े रहे। कई देशों ने पीछे से युद्ध रुकवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बनाया। इसमें सऊदी अरब और कतर आगे रहे। साथ में पाकिस्तान ने दोनों के बीच मध्यस्था की भूमिका निभाई। फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजीटल दस्तखत किए। इसके बाद अगले दौर की भी स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर, ईरान की तरफ से स्पीकर मोहम्मद बाघर गालबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराक्शी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन गुरबान जादेह और मध्यस्था में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी मौजूद रहे। हालांकि पहले दौर की बात के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां से चला गया। फिर भी जानकार बताते हैं कि दोनों पक्षों में सकारात्मक बातचीत हुई। इस बातचीत में ईरान ने इस्राइल के लेबनान पर हमलों का कड़ाई से विरोध किया था।

अब ईरान इस्लामिक देशों में अपनी पकड़ मजबूत बनाने में लग गया है। इसी सिलसिले में ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा किया। वहां पर उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपनी सुरक्षा के प्रति सजग न होता और इतनी तैयारी न हुई होती तो उसका भी हश्र गाजा की तरह होता। जैसे वहां पर हजारों बच्चों और महिलाओं को शहीद किया गया। जिस तरह फिलिस्तीनियों पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं उसी तरह ईरानियों पर भी जुल्म ढहाए जाते। ईरान ने स्ट्रेट आफ होर्मुज पर भी अपना कंट्रोल बनाए रखा है। यह रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है। इसीलिए स्पीकर और विदेश मंत्री ओमान दौरे पर गए। दोनों ने सुलतान तारिक अल सईद स्ट्रेट आफ होर्मुज पर सुरक्षित नौवहन पर चर्चा की। दोनों में सहमति बनी है कि दोनों देशों की नौसेना जहाजों की आवाजाही पर नजर रखेंगी। अब इस्राइल के शिपों के भी स्ट्रेट आफ होर्मुज से गुजरने में दुश्वारी हो सकती है। अब सभी देशों को अपने शिपों को वहां से निकालने के लिए ईरान और ओमान से समझोता भी करना पड़ सकता है। हालांकि अभी ईरान ने किसी तरह का टोल टैक्स लेने से मना किया है। आगे सुरक्षित निकासी के लिए कुछ फीस वसूली जा सकती है।

खास बात यह है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किए, इजिप्ट सैन्य समझौता कर चुके हैं। अब ईरान भी एक मजबूत देश बनकर उभर गया है। यह बात सभी खाड़ी देशों को मालूम हो गई है। इसलिए ईरान भी इस्लामिक नाटो जैसा संगठन बनाना चाहता है। ईरान अब सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, तुर्किए, इजिप्ट, ओमान, जार्डन के साथ इस्लामिक नाटो बनाने की ओर अग्रसर हैं। यह इस्राइल के लिए खतरे की घंटी होगी।

इस्लामिक विद्वानों का भी मानना है कि वर्तमान दौर में अमेरिका के पास पहले जैसी ताकत नहीं है। खाड़ी देशों के पास चीन और रूस जैसे संसाधनों से लैस देश हैं। इसलिए अब इसी में भलाई है कि अरब देश अमेरिका का मोह त्याग कर खुद अपनी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें। इस्लामिक देशों के पास पैसों और संसाधनों की कमी नहीं है। यह सभी देश एक साथ आ गए तो इस्राइल की भी हिम्मत किसी पर हमले की नहीं होगी। अमेरिका का इस्राइल के प्रति नरम रुख रहता है। यह सभी ने देख लिया। गाजा को खंडहर में तब्दील कर दिया लेकिन कोई प्रतिबंध नहीं लगे जबकि यूएन में भी उसके खिलाफ दर्जनों प्रस्ताव पारित हो चुके हैं। इसके बाद भी इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू धमकी देने से बाज नहीं आता है।

उधर, अमेरिका ने भी भांप लिया है कि अब अरब देश उससे दूर जा सकते हैं। इससे उसको आर्थिक नुकसान होगा। इसीलिए अमेरिकी विदेश मंत्री माक्रो रूबियो यूएई, कुवैत और बहरीन के दौरे पर गए हैं। वहां पर उन्होंने उन देशों के नेताओं से मिलकर ईरान समझौते के बारे में बताया। गौरतलब हो कि ईरान ने इन्हीं देशों में स्थित अमेरिका के सैन्य अड्डों पर सबसे ज्यादा मिसाइलें दांगी थीं। ईरान पर भी इन्हीं देशों पर अमेरिकी हमले का शक था। अब देखना होगा कि आगे इस्लामिक देश अपनी सुरक्षा के लिए किसको तवज्जो देते हैं। सऊदी अरब और अमेरिका में भी दूरियां बढ़ गई हैं।

 

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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