ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में हमारा देश बढ़ रहा है आगे- डॉ विनोद बिंद

एथेनॉल प्लांट का लगना किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार की दिशा में एक सशक्त कदम
चन्दौली । मिर्जापुर जनपद के अति पिछड़े ब्लाक हलिया के सेमरिहा गांव में मंगलवार की रात ब्रजदेव इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का उद्घाटन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने किया ।
इस मौके पर भदोही के सांसद डॉ विनोद बिंद बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित होते हुए बताया कि ब्रजभूमि की पावन धरती पर ब्रजदेव एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होकर अत्यंत गौरव की अनुभूति हुई।
डॉ बिंद ने कहा कि यहां केवल एक उद्योग का शुभारंभ नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है। एथेनॉल उत्पादन से गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने प्रबंधन टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास का नया अध्याय लिखेगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, पेट्रोल में मिश्रण से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।
कहा कि यहां एथेनॉल का प्लांट ही नही लगा बल्कि आत्म निर्भर बढ़ने की दिशा भारत आगे बढ़ रहा है । उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में हमारा देश जिस गति से आगे बढ़ रहा है उसके लिए हम प्रधानमंत्री मोदी जी को धन्यवाद देते है । कहा कि एथेनॉल प्लांट का लगना यहां के किसानों, गावं गिराव व नौजवानों के लिए सकारात्मक कदम है, इससे कार्बन इंडक्शन व प्रदूषण कम होगा । सांसद डॉ विनोद बिंद ने बताया कि एनर्जी के लिए हम 22 हजार करोड़ का बाहर से आयात करते थे आज हम एक प्रतिशत एथेनॉल पैट्रोल व ईंधन में मिश्रण बढ़ाते है तो हमे 4 हजार से 5 हजार करोड़ का मुनाफा होता है । कहा कि 2014 में हमारे देश मे एथेनॉल का प्रोडक्शन मात्र 3800 करोड़ लीटर था जो आज मोदी सरकार में बढ़कर 13 हजार करोड़ लीटर हो गया और राजस्व का फायदा 50 हजार करोड़ हो गया है ।कहा कि मोदी सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति, विशेषकर ई 20 (20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल) का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना, किसानों की आय बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है ।



