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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने धर्मादेश में कहा बिहार सरकार अविलंब गोचर भूमि को करें मुक्त

संजय पांडेय
भागलपुर।गौमतदाता संकल्प यात्रा के अंतर्गत भागलपुर पहुचें। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने गौमतदाता संकल्प सभा में एक धर्मादेश जारी कर बिहार सरकार को अविलंब गोचर भूमि को खाली करने के लिए कहा है। बिहार में गौशालाओं की दुर्दशा व अनेकों स्थानों पर गौशालाओं के बन्द हो जाने का मुख्य कारण भू-हदबंदी कानून है। जिसके अंतर्गत गौभक्तों द्वारा गोशाला के गायों का संरक्षण,संवर्धन व संपोषण हेतु दान में प्रदत्त भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया था।पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीगोशाला भागलपुर की स्थापना समाज के प्रबुद्ध गौभक्तों द्वारा की गई थी।तब से लेकर आजतक अबाध रूप से भागलपुर गोशाला में गायों का संरक्षण,संवर्धन व संपोषण,रखरखाव व सेवा गौभक्तों द्वारा की जा रही है।इन गौभक्तों द्वारा गोशाला में गौधन के संरक्षण व संपोषण हेतु लगभग हजार बीघा से अधिक जमीन की व्यवस्था गोशाला को दान देकर किया था।ऐसी ही व्यवस्था पूरे बिहार के अन्य गोशालाओं में वहा के गौभक्तों द्वारा किया गया था।लेकिन आपातकाल के समय मे तत्कालीन सरकार ने केवल भागलपुर के गोशाला की 200 बीघा से अधिक जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था।यही कार्य बिहार के अन्य गोशालाओं के साथ किया गया था।बिहार के गोशालाओं हेतु यह कृत्य अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ।यही नही आगे चलकर खुद को यदुवंशी,गौभक्त व कृष्ण का वंशज बताने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में बाकी बची हुई गौचर भूमि का भी अधिग्रहण कर लिया गया।यह सरकार द्वारा गौशाला हेतु दी गई कोई सरकारी भूमि नही थी जिसे सरकार ने वापस ले लिया।यह सनातनधर्मी गौभक्तों द्वारा मेहनत से अर्जित भूमि श्रद्धा से गौसेवा हेतु दान दी गई थी।और दान में दी गई भूमि का अधिग्रहण करने का अधिकार सरकार को भी नही है। पूज्यपाद श्रीशंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि अधिग्रहण की गई भूमि का अभी तक सरकार द्वारा वितरण नही किया गया है।

अगर सरकार चाहे तो एक कानून बनाकर उपरोक्त अधिग्रहण की गई समस्त जमीन को सम्बंधित गोशालाओं को वापस कर सकती है।पर वोट की राजनीति के स्वार्थ के कारण सरकार द्वारा अभी तक ऐसा निर्णय नही लिया जा सका है।उसी समय से श्रीगोशाला भागलपुर एवं बिहार की अन्य गोशालाएं अपनी गायों के संवर्धन व संपोषण हेतु अपनी जमीन वापस लेने हेतु संघर्षरत हैं।और जिन गोशालाओं के पास थोड़ी बहुत जमीन बची है उसपर भी बाहुबलियों व असामाजिक तत्वों ने कब्जा कर लिया है।पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने साथ ही कहा कि बिहार की सभी गोशालाओं पर सरकार का नियंत्रण है।सरकार के निर्देशानुसार बिहार की सभी गोशालाओं के अध्यक्ष शहर के अनुमंडल पदाधिकारी(SDO) हुआ करते हैं।फिर भी इक्षाशक्ति के अभाव में न तो अधिग्रहण की गई भूमि को वापस लिया जा सका है और न ही अतिक्रमित भूमि पर गोशालाओं को कब्जा दिलाने हेतु सरकार कोई ठोस कदम उठा रही है।समुचित संसाधनों और बिना किसी अतिरिक्त आय के साधन व धनाभाव में बिहार की अधिकतर गोशालाएं बन्द हो चुकी हैं और बाकी भी बन्द होने के कगार पर खड़ी हैं।गोशालाओं का मुख्य उद्देश्य केवल वृद्ध,अशक्त,असहाय व दूध न देने वाली गौमाता की सेवा और कसाइयों से बचाकर उनका पालन पोषण करना ही है।जो बिना आय के श्रोत के सम्भव नही है जिसे सरकार ने रोक रखा है।उपरोक्त कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री-स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद जी महाराज,दण्डी स्वामी श्रीनिधिरव्ययानन्द सागर,लक्ष्मीनारायण डोकानिया,रामगोपाल पोद्दार,बनवारी लाल खेतान,अतुल ढाढनिया,सुनील जैन,रोहित बाजोरिया,दीपक खेतान मंयक सिंघानियां,सत्यनारायण पोद्दार,गिरधारी केजरीवाल,देवेंद्र पाण्डेय,शैलेन्द्र योगी सहित भारी संख्या में गौभक्त बिहारवासी उपस्थित थे।

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