धार्मिक स्थलों से देश दुनिया में यूपी की साख बढ़ी

पहले देश दुनिया से लोग उत्तर प्रदेश में आगरा का ताज महल देखने आते थे, पर अब अयोध्या, मथुरा, वाराणसी व प्रयागराज आदि धामों में तीर्थयात्री दर्शन पूजन व परिक्रमा करने आते हैं। वर्ष 2015 में जहां एक करोड़ 47 लाख 59 हजार 858 तीर्थयात्री अयोध्या आए वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़ कर 29 करोड़ 95 लाख 99 हजार 794 हो गई। इसी प्रकार में 2015 में जहां 69 लाख 39 हजार 354 धार्मिक पर्यटक वाराणसी आए वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 17 करोड़ 30 लाख 73 हजार 888 हो गई। मथुरा में 2015 में जहां चार करोड़ 67 लाख 84 हजार 925 धार्मिक पर्यटक आएं वही 2025 में संख्या बढ़कर 10 करोड़ 24 लाख 63 हजार 949 हो गई। प्रयागराज में वर्ष 2015 में जहां चार करोड़ एक लाख 65 हज़ार तीर्थ यात्री आए वहीं 10 साल बाद 2025 में इनकी संख्या बढ़ कर 69 करोड़ 14 लाख 96 हजार 115 हो गई। यूपी ने धार्मिक पर्यटन क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। इसकी बदौलत यूपी घरेलू पर्यटन में देश में पहले पायदान पर है। वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश आने वालों की संख्या जहां 21करोड़ के करीब थी वही 10 साल बाद 2025 में इनकी संख्या 137 करोड़ पार कर गई है।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर व वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर बनने से तीर्थ यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बेहतर कनेक्टिविटी भी इसका कारण है। फ्लाईओवर व सड़कों का जाल बनने से लोग आसानी से अयोध्या, मथुरा, काशी व प्रयागराज आदि पहुंच रहे हैं। एयरपोर्ट की संख्या बढ़ाने व वंदे भारत ट्रेन चलने से भी तीर्थ यात्रियों की संख्या बड़ी है। देश के कुल पर्यटक प्रवाह में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 2003 में 25.6 प्रतिशत थी जो 2016 में घटकर 13.1 प्रतिशत रह गई थी। वर्ष 2023 में 18.99 प्रतिशत के साथ यह मजबूत वापसी कर गई है। अयोध्या में दीपोत्सव, काशी में देव दीपावली व ब्रज में लठमार होली देखने के लिए देश दुनिया से लोग आते हैं। तीर्थ में अयोध्या, मथुरा, काशी व प्रयागराज का बहुत महत्व है। अयोध्या उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन और पवित्र नगर है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में विश्वविख्यात है। सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या भारतीय संस्कृति, आस्था और इतिहास का प्रमुख केंद्र रही है। रामायण काल से जुड़ा यह नगर धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। अयोध्या को सप्त पुरियों में शामिल किया गया है, जहां मोक्ष की कामना से श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए आते हैं। यहां राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित अनेक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल स्थित हैं। अयोध्या आज आस्था, संस्कृति और विकास का संगम बनकर भारत की सनातन परंपरा को सशक्त रूप में प्रस्तुत कर रही है।

चीफ एडिटर
मथुरा भी उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन एवं पवित्र नगर है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। यमुना नदी के तट पर स्थित यह नगर भारतीय धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पुराणों और महाभारत काल से जुड़ी मथुरा भूमि ब्रज संस्कृति की आधारशिला है। यहां श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, विश्राम घाट सहित अनेक धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। मथुरा को भी सप्त पुरियों में स्थान प्राप्त है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्तमान समय में मथुरा धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है। जन्माष्टमी, होली और अन्य ब्रज महोत्सवों के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम मथुरा को भारत की आध्यात्मिक विरासत में विशेष स्थान प्रदान करता है।
काशी, जिसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है, विश्व के प्राचीनतम निरंतर आबाद नगरों में गिनी जाती है। गंगा नदी के तट पर स्थित यह नगरी भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्म का प्रमुख केंद्र है। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और यह सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखती है। पुराणों और उपनिषदों में वर्णित काशी को मोक्षदायिनी नगरी कहा गया है। मान्यता है कि यहां प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट जैसे धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। वर्तमान समय में काशी आध्यात्म के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, गंगा आरती और सांस्कृतिक आयोजनों ने नगर की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और सुदृढ़ किया है। काशी आज भी आस्था, परंपरा और विकास का जीवंत संगम बनी हुई है।
प्रयागराज भी उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन और पवित्र नगर है, जिसे तीर्थराज के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित यह नगर भारतीय धर्म, आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पुराणों में वर्णित प्रयागराज को यज्ञों और तपस्या की भूमि कहा गया है। यहां स्थित त्रिवेणी संगम में स्नान को मोक्षदायी माना जाता है। कुंभ, अर्धकुंभ और माघ मेला जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों के कारण प्रयागराज को वैश्विक पहचान मिली है। वर्तमान समय में प्रयागराज धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है।ऐतिहासिक धरोहरों और आध्यात्मिक परंपराओं के कारण प्रयागराज भारतीय सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।




