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देशनई दिल्ली

National News भारत-यूरोप की साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच कई वर्षों की लंबी बातचीत के बाद 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) हो गया है। भारत और ईयू नेताओं ने यहां आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इसका ऐलान किया। इससे निवेश बढ़ेगा, नई इनोवेशन पार्टनरशिप बनेंगी और वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन मजबूत होगी। यूरोप के 27 देशों के साथ हुआ यह महज एक ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है, बल्कि भारत-यूरोप की साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच मंगलवार को यहां हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय एवं प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस वक्तव्य दिया गया। समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स में बड़ी कटौती की गई है, जिससे भारत में लग्जरी गाड़ियों की कीमतें कम होने का रास्ता साफ हो गया है। यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से घटाकर मात्र 10 फीसदी कर दिया गया है।
भारत-ईयू साझेदारी को विश्व की भलाई से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इससे उथल-पुथल भरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। उन्होंने कहा आज भारत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। ये दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण बना है। ये समझौता ग्लोबल जीडीपी के करीब 25 फीसदी और ग्लोबल ट्रेड के करीब एक तिहाई हिस्से को रिप्रजेंट करता है। ये समझौता ट्रेड के साथ-साथ डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति हमारे शेयर्ड कमिटमेंट को भी सशक्त करता है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एग्रीमेंट के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप, मोबिलिटी पर सहयोग का कॉम्प्रिहेंसिव फ्रेमवर्क और आज साइन किए गए अन्य समझौते एक बड़ी, गहरी और मजबूत पार्टनरशिप की नींव रखते हैं। आज का भारत-ईयू समिट मल्टीपोलैरिटी को मजबूत करेगा और ग्लोबल ऑर्डर को जोखिम से बचाने में मदद करेगा।पीएम मोदी और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया। वहीं यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा ने कहा ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है। ऐसे में भारत और यूरोप के बीच ये साझेदारी ऐतिहासिक है। भारत हमारे भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर आगे आया है। भारत तेजी से बढ़ती इकॉनमी है और इस डील से दो अरब लोगों का फायदा होगा।
समझौते से एक दिन पहले 26 जनवरी को ईयू नेताओं ने पहली बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया था, जो कि दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विश्वास और भरोसे को दर्शाता है। बता दें कि भारतीयों के लिए यूरोपीय कारें, वाइन, बीयर और कई खाद्य पदार्थ सस्ते होने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ ने कहा है कि भारत यूरोपीय संघ से आने वाले 96.6 फीसदी सामान पर टैरिफ को हटा देगा या कम कर देगा। इससे यूरोपीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में सालाना 4 अरब यूरो तक की बचत होगी।  इस समझौते से मशीनरी, रसायन, फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड जैसे यूरोपीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ खत्म हो जाएंगे। ईयू के लगभग सभी विमानों और अंतरिक्ष यान के भारत को होने वाले निर्यात पर लगने वाले शुल्क भी हटा दिए जाएंगे। साथ ही भारत से यूरोप को निर्यात होने वाले 90 फीसदी से ज्यादा माल पर टैरिफ शून्य हो जाएगा, जिनमें मुख्य तौर पर जूते, आभूषण, समुद्री उत्पाद, खिलौने, कपड़े आदि शामिल हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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