उत्तर प्रदेश में अब पोमैटो की खेती

उत्तर प्रदेश के किसान अब पोमैटो की खेती करेंगे, यानी एक ही पौधे में ऊपर टमाटर और नीचे आलू होगा। किसानों के लिए यह एक नया अवसर है- एक पौधा लगाओ और दो फसलें पाओ। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में यह पहला मौका है जब पोमैटो का प्रदर्शन किया गया है। अगले वर्ष किसानों को पोमैटो तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे स्वयं इस पौधे को तैयार कर सकें और कम जगह में दोगुनी फसल ले सकें। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र में यह पौधा चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पौधे का नाम है पोमैटो, यानी आधा आलू और आधा टमाटर। जड़ (भूमिगत तने) वाले हिस्से में जहां आलू हो रहा है वहीं ऊपरी शाखाओं पर टमाटर। प्रदर्शन के लिए पौधे क्यारी और गमलों में लगाए गए हैं। यह कोई जेनेटिक इंजीनियरिंग या जीएम फसल नहीं है, बल्कि साधारण ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किया गया पौधा है। आलू और टमाटर दोनों नाइटशेड (सोलानेसी) परिवार के पौधे होने के कारण एक-दूसरे पर आसानी से ग्राफ्ट हो जाते हैं।
इस तकनीक को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. अनंत बहादुर और अनीश कुमार सिंह ने विकसित किया है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी ने भारत में सब्जी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध और विकास कार्य किए है। संस्थान ने अब तक 100 से अधिक नई सब्जी किस्में विकसित किए हैं। इन प्रजातियों में कई तरह के टमाटर, बैंगन, भिंडी, लोबिया, टोरी, और अन्य प्रमुख सब्जियाँ शामिल हैं। आलू व टमाटर के फायदे को देखते हुए यह तकनीक विकसित की गई है। भारतीय रसोई में आलू एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जो लगभग हर घर में रोज़ाना इस्तेमाल होता है। स्वाद में लाजवाब और कीमत में किफायती आलू को अक्सर केवल मोटापा बढ़ाने वाला माना जाता है, लेकिन पोषण विशेषज्ञों के अनुसार सीमित और संतुलित मात्रा में आलू का सेवन स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी है। आलू में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। शारीरिक श्रम करने वालों, खिलाड़ियों और बच्चों के लिए यह एक अच्छा ऊर्जा स्रोत माना जाता है। आलू में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर करता है। उबला हुआ या भुना हुआ आलू गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक होता है। आलू में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

अशोक कुमार मिश्र
इससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है।आलू में विटामिन-सी, विटामिन-बी6, आयरन और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। विटामिन-सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जबकि आयरन खून की कमी दूर करने में सहायक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार आलू का रस त्वचा की जलन, दाग-धब्बे और सनबर्न में राहत देता है। वहीं आलू में मौजूद पोषक तत्व बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी सहायक होते हैं।
आलू की तरह भारतीय भोजन में टमाटर का विशेष स्थान है। सब्ज़ी, दाल, सलाद या चटनी, हर रूप में इस्तेमाल होने वाला टमाटर न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार रोज़मर्रा के आहार में टमाटर को शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। टमाटर में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है। टमाटर में मौजूद लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा घटता है। चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन प्रोस्टेट, फेफड़े और पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है।
पका हुआ टमाटर या टमाटर से बने उत्पादों में लाइकोपीन अधिक प्रभावी होता है।टमाटर में विटामिन-ए और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और जवां बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह आंखों की रोशनी के लिए भी लाभकारी है।कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण टमाटर वजन नियंत्रित रखने में सहायक है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अनावश्यक खाने से बचाव होता है। टमाटर में मौजूद फाइबर और प्राकृतिक अम्ल पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। यह कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। इसी को ध्यान में रखकर पोमैटो की खेती शुरू होने वाली है।




