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खदान हादसा: पत्थर के मलवे के नीचे दबकर सात श्रमिकों की दफन हुई जिंदगी

घटना के चौथे दिन मंगलवार की दोपहर बाद तक संयुक्त टीम की सर्च अभियान हुआ खत्म,मानकों के विपरीत अवैध खनन, अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल

राकेश चंदेल
हिन्दुस्तान संदेश/सोनभद्र। ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी स्थित मे. कृष्णा माइंस की खदान में गत शनिवार को हुएं हादसे के दौरान पत्थर के मलवे के नीचे दबे सात श्रमिकों के शवों को बरामद कर लिया गया है। मंगलवार को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें खदान में उतरकर लगातार घटना के चौथे दिन भी दबे श्रमिकों की खोजबीन में जूटी रहीं दोपहर बाद हुआ खत्म मानकों को ताक पर रखकर कराए गए अवैध खनन की वजह से ओबरा के बिल्ली-मारकुंडी स्थित मे. कृष्णा माइंस की खदान काफी गहरी हो चुकी है। इस खदान में ब्लास्टिंग के लिए गत शनिवार को नौ कंप्रेशर मशीनों के जरिए करीब दर्जनों श्रमिक ड्रिलिंग का कार्य कर रहे थे। उसी दौरान अचानक खदान का उपरी छोर ढ़ह गया और पत्थर के मलवे के नीचे तमाम श्रमिक दब गए थे। हादसे के दौरान कुछ श्रमिक भाग कर अपनी जान बचाई थी, श्रमिकों के दबे होने की चर्चा रही। घटना की सूचना पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने वस्तु स्थिति का जायजा लेने के बाद मलवे के नीचे दबे श्रमिकों के शवों को बाहर निकालने का कार्य शुरू कराया था। हालांकि उस दौरान खदान में भारी पत्थर गिरने की वजह से राहत कार्य में जूटे कर्मियों को तत्काल में सफलता नहीं मिल पाई थी। बाद डीएम ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर बुलायी। दोनों टीमों के कर्मियों ने दिन-रात एक कर युद्धस्तर पर बचाव/राहत कार्य जारी रखा। घटना के तीसरे दिन सोमवार की देर शाम तक दोनों टीमों के कर्मियों ने खदान में पत्थर के मलवे के नीचे दबे सात श्रमिकों के शवों को बरामद किया। हालांकि मंगलवार को भी घटना के चौथे दिन खदान के मलवे में एक श्रमिक को निकाला गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें दोपहर बाद राहत कि शांस ली

मे.कृष्णा माइंस स्टोन की खदान में हुए हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का पर्देे के पीछे छिपा काला चेहरा भी आमजन के सामने उजागर हो गया। यह खदान करीब 500 फीट से अधिक गहरी और खतरनाक तरीके से खड़ी है। इस खदान में सुरक्षित खनन के लिए हाइट बेंच का भी निर्माण नहीं कराया गया था। फेरेटिक जोन के नीचे पानी निकाल कर खनन किया जा रहा था, जो कि  शर्तों के खिलाफ है। अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने बताया कि इन्हीं विषयों पर ऋतिशा गोंड की ओर से 268 पेज की याचिका मे. कृष्णा माईनिंग स्टोन वर्क्स के अलावा में. राधे-राधे इंटरप्राइजेज, एवं मे.अजंता माइनिंग एंड मिनिरल्स. कामाख्या स्टोन के विरुद्ध एनजीटी में दाखिल की गई है, जिस पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर अदालत को बताया है कि जांच के दौरान मे. कृष्णा माईनिंग वर्क्स व अन्य खदानों का संचालन मानक के अनुरूप पाया गया है। जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। बात करें, खदान की तो यहां सारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर पट्टाधारकों द्वारा अवैध खनन कराया जा रहा था, जिसकी वजह से इतनी बड़ी घटना देखने को मिली। अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने कहा कि इस घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार हैं। इसकी भी सरकार को उच्च स्तरीय जांच कराकर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जिम्मेदारों पर मुकदमा दर्ज करानी चाहिए।

श्रमिकों की दफन हुई जिंदगी…
खदान हादसे में सात श्रमिकों की दफन हुई जिंदगी
मे. कृष्णा माइंस की खदान में पत्थर के मलवे के नीचे दबकर अपनी जान गवांने वाले सात श्रमिकों में से छह मजदूर ओबरा थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों के निवासी रहे। एक श्रमिक की शिनाख्त कोन थाना क्षेत्र के कचनरवा गांव निवासी के रूप में की गई है। इस हादसे में ओबरा के परसोई टोला अमेरीनिया निवासी राजू सिंह गोंड उम्र 40 वर्ष पुत्र त्रिवेणी सिंह, करमसार पनारी निवासी  संतोष यादव उम्र 30 वर्ष पुत्र शोभनाथ यादव, इंद्रजीत यादव उम्र 32 वर्ष पुत्र शोभनाथ यादव, रामखेलावन खरवार पुत्र सीताराम उम्र 40 वर्ष निवासी पनारी टोला खङरी , कृपाशंकर खरवार पुत्र सूरज नारायण उम्र 35 वर्ष निवासी पनारी टोला खड़री, गुलाब सिंह खरवार पुत्र हंसु प्रसाद उम्र 32 वर्ष ग्राम परसोई टोला रोनीहवा व रविन्द्र गोड उर्फ नानक उम्र 18 वर्ष पुत्र राजकुमार निवासी कचनरवा थाना कोन के शव का पोस्टमार्टम कराकर दाह संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है।

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