

150 वर्ष पूरे होने पर सामूहिक गायन
Up Ghazipur News राजकीय होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अध्यापकों और छात्रों ने सामूहिक रूप से प्रातः वंदन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन किया। वंदे मातरम’ की रचना के 150 साल पूरे हो रहे हैं। प्राचार्य राजेंद्र सिंह ने छात्रों को राष्ट्रीय गीत के महत्व के बारे में बताया। श्री बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम अक्षय नवमी के पावन अवसर पर 7 नवंबर 1875 को लिखा गया। वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के एक अंश के रूप में प्रकाशित हुआ था। मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताते हुए इस गीत ने भारत की एकता और आत्मगौरव की जागृत भावना को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी। यह गीत जल्द ही राष्ट्र के प्रति समर्पण का एक चिरस्थायी प्रतीक बन गया।इसे संशोधित कर हिंदी में भी अपनाया गया। प्रोफेसर सुबोध त्रिपाठी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन समाज के सभी वर्गों के लोगों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित करता है। यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के प्रतीक के रूप में याद करता है। वंदे मातरम भारत की एकता और राष्ट्रीय गौरव का स्थायी प्रतीक बन गया है। इस मौके पर प्राचार्य राजेंद्र सिंह, प्रोफेसर सुबोध त्रिपाठी , प्रोफेसर डी पी सिंह, प्रोफेसर नितिन त्यागी, प्रोफेसर विवेक पांडेय, प्रोफेसर मनोहर लाल, सहित समस्त शिक्षक गण एवं सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।




