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उत्तर प्रदेशवाराणसी

वाराणसी: अनाज बैंक दुनिया में  जहां भूख की समस्या,पीड़ितों की मदद की: डॉ सुखदेव सिंह

सुशील कुमार मिश्र /वाराणसीविश्व का पहला अनाज बैंक 10 साल पूरा कर लिया। स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल भारत संस्थान द्वारा अनाज बैंक भूख की वैश्विक समस्या का सामाजिक हल” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं महावितरण का आयोजन किया।इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुटुम्ब प्रबोधन के प्रांत संयोजक डॉ० शुकदेव त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि कैंट के सहायक पुलिस आयुक्त नितिन तनेजा ने सुभाष मन्दिर में नेताजी सुभाष की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपोज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आजाद हिन्द बटालियन की सेनापति दक्षिता भारतवंशी के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने अतिथियों को सलामी दी।अनाज बैंक के माध्यम से 510 महिलाओ को अनाज के साथ चीनी और रिफाइंड भी दिया गया ताकि दीपावली पर पकवान बनाकर दीपावली मना सके।इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ० शुकदेव त्रिपाठी ने कहा कि अनाज बैंक सामाजिक सहभागिता का श्रेष्ठ मॉडल है। अनाज बैंक का मॉडल अपनाकर दुनिया के अन्य देशों जहां भूख की समस्या है।भूख पीड़ितों की मदद की जा सकती है। यह भावनाओ और संबंधों के आधार पर चलता है, इसलिए भूख पीड़ितों तक अपनी पहुच बना पा रहा है।विशिष्ट अतिथि एसीपी कैन्ट नितिन तनेजा ने कहा कि अनाज बैंक के माध्यम से वंचित लोगों तक पहुंचकर वास्तविक लाभार्थियों को अनाज दिया जा सकता है। साथ ही जो लोग अपने बुजुर्ग मा बाप को घर से निकाल देते है, उससे भूख की समस्या बढ़ जाती है ,ऐसे में अनाज बैंक उनका मददगार बनता है। अनाज बैंक सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक हल है।विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि अनाज बैंक के जमा खाताधारकों को निकासी खाताधारकों की चिंता रहती है। यह सामाजिक संबंधों और रिश्तो को मजबूत करता है। अनाज बैंक ने अब तक 1 लाख से अधिक भूख पीड़ितों की मदद की है। कोरोना काल मे 27 हजार लोगों तक भोजन और अनाज पहुचाया गया। अनाज बैंक ने 10 साल सेवा करते पूरे कर लिए। तलाकशुदा, विधवा, निराश्रित, आदिवासी समाज के लोगो का खोजकर खाता खुलवाया जा रहा है ताकि उनको भूख से मुक्ति की गारंटी मिल सके। अनाज बैंक की शाखाएं पूर्वी उत्तर प्रदेश के 10 जनपदों और बुंदेलखंड में है। जहाँ भूख की समस्या होगी वहां अनाज बैंक खोला जाएगा।
अध्यक्षता रामपंथ के धर्म प्रवक्ता डॉ० कवीन्द्र नारायण ने किया एवं धन्यवाद डॉ० निरंजन श्रीवास्तव ने दिया। संगोष्ठी का संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।

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