
सातवें दिन 560 किसानों ने लिया भाग,ड्रोन प्रदर्शन रहा आकर्षण का केंद्र
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों, केवीके एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान 2025 के सातवें दिन उत्तर प्रदेश के छह जिलों में व्यापक किसान संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सातवें दिन 6 जिलों के कुल 4500 से अधिक किसानों ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया, जिनमें से 286 किसानों ने सक्रिय रूप से वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी चर्चा की।वाराणसी जिले में आयोजित कार्यक्रमों में 12 गांवों में विशेष तकनीकी प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें ऑन-फार्म कंपोस्टिंग तकनीकी पर व्यापक चर्चा, ड्रैगन फ्रूट की खेती के तकनीकी पहलुओं का प्रदर्शन, गर्मी के मौसम में टमाटर एवं भिंडी की खेती करने वाले स्थानीय किसानों के साथ तकनीकी वार्तालाप, खरीफ सब्जी उत्पादन तकनीक और आइआइवीआर की नवीन सब्जी किस्मों का परिचय, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती के व्यावहारिक तरीकों पर मार्गदर्शन, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक का प्रदर्शन और कीट-पतंग प्रबंधन की आधुनिक विधियों पर चर्चा शामिल रही। इन सभी के बीच ड्रोन दीदी द्वारा कृषि ड्रोन उड़ान प्रदर्शन किसानों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे किसानों ने बड़े उत्साह के साथ देखा और इसके उपयोग की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी ली।
वाराणसी जिले में नौ कार्यक्रमों में 560 किसानों ने भाग लिया, जिनमें से 78 किसानों के साथ गहन तकनीकी संवाद हुआ। किसानों द्वारा उठाई गई मुख्य समस्याओं में जंगली जानवरों से फसलों के नुकसान, गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी और कीट-पतंग प्रबंधन शामिल रहा। आइआइवीआर के निदेशक ने आज वाराणसी जिले के रमना गांव में 92 किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया और संस्थान की नवीन तकनीकों, जैविक खेती, डायरेक्ट सीडिंग ऑफ पैडी और मिट्टी परीक्षण के महत्व पर चर्चा की।निदेशक ने आकाशवाणी वाराणसी के लिए विशेष रेडियो कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझकर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक, जैविक खेती और फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में मशरूम उत्पादन, पशुपालन एवं डेयरी तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।




