
उत्पल दादा
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत पंडित लोकपति तिवारी ने मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाते हुए विज्ञप्ति जारी कर कहा कि, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दिनांक 9 अगस्त को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया एवं झूलनोत्सव श्रृंगार की परंपरा का निर्वहन हुआ।पूर्व महंत ने आरोप लगाते हुए खंडन किया की इस वर्ष भी मंदिर प्रशासन ने जनता को गुमराह करके इस परंपरा को पूर्ण रूप से खंडित किया है और टेढ़ीनीम स्थित पं० वाचस्पति तिवारी के आवास पर रखी गई विवादित नकली पंचबदन चल प्रतिमा को बाबा के गर्भगृह में रखकर पूजन,अर्चन,राग-भोग,आरती संपन्न करवाया और बाबा विश्वनाथ की प्राचीन रजत चल प्रतिमा को बड़ादेव गोदौलिया स्थित मेरे आवास पर रोक कर जनता को धोखा एवं बाबा विश्वनाथ की इस विशेष परम्परा का अपमान किया है। इस तरह प्रत्येक वर्ष मेरे द्वारा पत्र लिखकर प्राचीन प्रतिमा को मंदिर ले जाने की अनुमति मांगी जाती है। जिस पर कोई सुनवाई नहीं की जाती है और मंदिर प्रशासन के द्वारा प्राचीन प्रतिमा को मंदिर में जाने से रोका जा रहा है।उन्होंने कहा कि,इस परंपरा की शुरुआत मेरे दादा पं० महावीर प्रसाद तिवारी जी के द्वारा की गई थी। जिनकी प्रतिमा बाबा के गर्भगृह के दक्षिणी दीवार पर विराजित है इसके बाद से ही हम दोनों भाई स्व० कुलपति तिवारी व मैं स्वयं लोकपति तिवारी मिलकर इस परंपरा को पूर्व महंत आवास से करते चले आ रहे थे, जिसका सहमति पत्र भी हम दोनों के बीच में लिखा गया था। स्वर्गीय कुलपति तिवारी जी के देहान्त के बाद परिवार में बड़े होने के नाते मैं स्वयं इस परंपरा को सम्पन्न करवाने का हकदार हूं, जिसमें पं० वाचस्पति तिवारी जी को इस परंपरा को नकली मूर्ति से करने का कोई हक नहीं है।उन्होंने संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने को कहा।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, मै काशी की जनता को बताना चाहता हूं कि इस वर्ष भी मंदिर में होने वाली परंपरा को मंदिर प्रशासन के सहयोग से पं० वाचस्पति तिवारी के द्वारा नकली रजत चल प्रतिमा से मंदिर की परंपरा को संपन्न किया गया है जबकि बाबा की प्राचीन रजत चल प्रतिमा बड़ादेव स्थित मेरे महंत आवास पर विराजित है जिसे इस वर्ष भी मन्दिर प्रशासन द्वारा गुमराह करके मंदिर जाने से रोका गया है।





