
सुशील कुमार मिश्रा /वाराणसी । आज वर्तमान परिवेश में समाज में सभी डरें हुए है,असमंजस की स्थिति बनी है,लोगों को लग रहा है कि जो कुछ भी है वह भी ना चला जाए योग यज्ञ अनुष्ठान वह भी दूषित हो रहे हैं। ऐसे संक्रमण कालीन दौर में रामचरितमानस सबसे बड़ा मित्र है गुरु है। इसे जीवन में उतारने से सब कुछ मिल जाएगा। कलिकाल में तुलसी मानस ही प्रासंगिक है। यह विचार अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास पीठाधीश्वर प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्र के हैं, जो वे आज तुलसी घाट पर आयोजित दो दिवसीय तुलसी जयंती समारोह के पहले दिन व्यक्त किया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि आज गोस्वामी तुलसीदास के रास्ते पर चलकर ही सब कुछ पाया जा सकता है। काशी की सभ्यता संस्कृति से जोड़कर ही समाज का कल्याण हो सकता है। प्रोफेसर देवव्रत चौबे व पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य ने कहा कि दलित उपेक्षित अधिकार वंचितों के मित्र थे तुलसी। उन्होंने राम को जन-जन में उतारा। उत्तर भारत के जनता के नस नस में राम को बैठाया।हनुमान की मूर्ति को लोकमानस में उतारा। राम का नाम लेकर लौकिक और पारलौकिक के रूप में लोगों को जगाया।इस अवसर पर प्रोफेसर नलिन श्याम कामिल,प्रोफेसर सिद्धनाथ उपाध्याय,डॉ रामावतार पांडेय,आचार्य दिव्य चैतन्य स्वरूप,पुंडरीक शास्त्री व प्रोफेसर नवल किशोर मिश्र ने भी विचार व्यक्त किया। प्रारंभ में कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण व मोहित साहनी के गणेश वंदना से हुआ।अतिथियों का माल्यार्पण राघवेंद्र पांडेय ने व संचालन श्रीनिवास पांडेय ने किया। इस अवसर पर टी एम महापात्र,प्रोफेसर अनूप मिश्रा, अशोक पाण्डेय,विनोद पांडे, राजेश मिश्रा,संदीप पाण्डेय, विश्वनाथ यादव एच एन मिश्रा,रामयश मिश्रा सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।




