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गाजीपुरसाहित्य

गाजीपुर: प्रेमचंद प्रारंभ में महर्षि दयानंद के विचारधारा से थे प्रभावित: आदित्य प्रकाश

गाजीपुर । नगर के डी ए.वी इंटर कॉलेज परिसर में आर्य विद्या सभा द्वारा आयोजित  सम्राट  मुंशी प्रेमचंद एवं नवगीतकार डॉ. उमाशंकर तिवारी की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश संचालन अर्थशास्त्र के प्रवक्ता प्रांशु उपाध्याय ने किया। डॉ.संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ उपन्यासकार और कहानीकार थे।गबन, गोदान, रंगभूमि, प्रेमाश्रम, कर्मभूमि जैसे कालजयी उपन्यास लिखें। उन्होंने लगभग 300 कहानियां लिखी, जो मानसरोवर के नाम के संकलन के विभिन्न भागों में संकलित है। डॉ.उमाशंकर तिवारी गाजीपुर के निवासी थे, उनका जन्म 1940 में गाजीपुर के बहादुरगंज में हुआ था । नव गीत संग्रह “जलते शहर में” “धूप कड़ी है” “तोहफे कांच घर के” एवं “असहमत समय” प्रकाशित है। उनके नवगीतों में आम आदमी की पीड़ा, घुटन, विडंबना, गरीबी ,संत्रास का चित्रण है। प्रबंधक आदित्य प्रकाश आर्य ने कहा कि प्रेमचंद प्रारंभ में महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारधारा से प्रभावित थे। उनके प्रारंभिक लेखन आर्य समाज के विचारों से अनुप्राणित था। प्रारंभ में उनके उपन्यास कटनी और नाटक देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोध थे। प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है।उनके लेखन पर समाज सुधार आंदोलन एवं स्वाधीनता संग्राम का प्रभाव दिखता था। उनके संग्रह में दहेज, अनमेल विवाह, पराधीनता, लगन, छुआछूत, जाति भेद, विधवा विवाह का चित्रण मिलता है।इस अवसर पर विद्यालय की हिंदी के प्रवक्ता शैलेश कुमार ओझा, आशुतोष कुमार मिश्रा, जितेंद्र कुमार यादव और विद्यालय के कक्षा 9 के छात्र आशीष वर्मा एवं कक्षा 10 की छात्र आफ़रीन बानो ने भी विचार व्यक्त किया। प्रधानाचार्य हरिशंकर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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