
by Basant Kumar
मिर्जापुर।लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा आज, 27 अक्टूबर, को अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गया है। इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले) नदी, तालाब या कृत्रिम घाटों पर खड़े होकर अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्यदेव को पहला अर्घ्य दिया। इसके साथ ही, 36 घंटे का निर्जला (बिना जल के) उपवास अपने चरम पर पहुंच गया।नहाय-खाय से हुई थी शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय’ के साथ इस महापर्व का शुभारंभ हुआ था। इसके अगले दिन, 26 अक्टूबर को ‘खरना’ की रस्म निभाई गई, जिसमें व्रतियों ने दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया। खरना के बाद से ही व्रतियों का कठोर 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, आज (27 अक्टूबर) संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त शाम 5:10 बजे से लेकर 5:48 बजे तक था। इस दौरान, व्रती सूप या बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, गन्ना और विभिन्न प्रकार के प्रसाद सजाकर जल में खड़े होकर सूर्यदेव की अंतिम किरण (देवी प्रत्यूषा) को अर्घ्य दिया और संतान के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा आरोग्य की कामना की। छठ पर्व का समापन कल यानी 28 अक्टूबर, मंगलवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा, जिसे ‘ऊषा अर्घ्य’ कहा जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ेंगे, जिसे ‘पारण’ कहा जाता है। छठ पर्व सूर्य देव और छठी मैया (संतान की रक्षा करने वाली देवी) की आराधना का प्रतीक है, जो प्रकृति, पवित्रता और सामूहिक सद्भाव का अनूठा संदेश देता है।




