वाराणसी : जीवन में यम-नियम की साधना कुंडलिनी जागरण का मूल आधार – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

वाराणसी। साधना के मार्ग पर अग्रसर होने वाले साधकों के लिए जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया है। जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक उन्नति और ऊर्जा के जागरण के लिए जीवन में यम और नियम का पालन सर्वोपरि है। साधक को सबसे पहले अपने जीवन में यम-नियम को साध लेना चाहिए।आचरण की शुद्धता,संयम और अनुशासन के बिना उच्च आध्यात्मिक अनुभूतियों को संभालना संभव नहीं होता।जब यम और नियम के माध्यम से आधार मजबूत हो जाता है,तभी साधक को कुंडलिनी जागरण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कुंडलिनी शक्ति के जागरण के संदर्भ में उन्होंने तीन मुख्य मार्गों का उल्लेख किया। देवी कृपा: जगदम्बा की अहैतुकी अनुकंपा और भगवद्- अनुग्रह। गुरु कृपा: तत्त्वदर्शी गुरु का सुयोग्य मार्गदर्शन, शक्तिपात और आशीर्वाद। साधना: साधक का निरंतर,निष्ठापूर्वक और अनुशासित प्रयास। इन तीन मार्गों के समन्वय से ही साधक के भीतर सोई हुई मूल शक्ति (कुंडलिनी) का जागरण संभव होता है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरा नंद ने सभी साधकों को किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचकर पहले आत्म- नियंत्रण और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने को कहा,जिससे साधना का मार्ग सुरक्षित और फलदायी बन सके। ज्ञातव्य है कि प्रतिदिन प्रातः 4.30 से प्रातः मंगलम्,6 बजे से साधना शिविर,8030 से महापूजा और नव चण्डी पाठ,अपराह्न 2 बजे से शिविर का द्वितीय सत्र और सायं विशेष अर्चन सम्पन्न हो रहा है। उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।



