मोदी सरकार ने वीर सपूतों की शहादत को छुपा लिया
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए थे देश के छह जवान, 13 महीने बाद आए नाम सामने, संसद में रक्षा मंत्री ने कहा था ऑपरेशन में कोई क्षति नहीं हुई, बलिदान को नकारने का काम कियाः सुप्रिया श्रीनेत
कानपुर। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। अब साढ़े तेरह महीने बाद इस ऑपरेशन में शहीद छह सैनिकों के नाम सार्वजनिक होने पर सरकार घेरे में आ गई है जबकि संसद में बहस के दौरान ‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि विपक्ष को सवाल पूछना चाहिए कि ऑपरेशन में किसी जवान की क्षति हुई है कि नहीं तो जवाब है नहीं’। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इनके नाम लिखने पर बलिदान की जानकारी हो पाई। इस पर तो पूरा देश सन्न रह गया। विपक्ष ने इस मामले में सरकार को जबरदस्त घेरा है।
ऑपरेशन सिंदूर के वक्त देश के ये सपूत सूबेदार मेजर पवन कुमार,राइफल मैन सुनील कुमार, वीर चक्र, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर एस मुरलीनायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह, रार्जेंट सुरेंद्र कुमार शहीद हो गए थे लेकिन मोदी सरकार ने सपूतों की शहादत को छुपा लिया। शहीदों का सम्नान भी सरकार खा गई।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि शहीदों के बलिदान छिपाने में भी घोटाला हो सकता है। क्या यह हैरान करने वाली बात नहीं? कितने जवान शहीद हुए यह नाम पहली बार सार्वजनिक किए गए हैं। मेमोरियल में नाम दर्ज होने पर यह जानकारी हुई। इससे पहले आधिकारिक तौर पर इनके नाम नहीं बताए गए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अग्गिनवीर की मां ने अदालत में रिट दायर कर पेंशन की मांग की लेकिन मोदी सरकार ने आजीवन पेंशन देने से इनकार कर दिया।
रक्षा विशेषज्ञ हेमंत अत्री कहते हैं कि फौज के अंदर जवान व अधिकारी की शहादत होने पर कमांड कोर के पीआरओ जानकारी देते हैं। इसके बाद स्टेशन हेडक्वाटर से शहीदों के घरवालों को जानकारी दी जाती है। यहां पर ऐसा कुछ नहीं किया गया।28 जुलाई को संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारा कोई सैनिक शहीद नहीं हुआ लेकिन एक साल तक उनके नाम नहीं बताए गए। यही बात अगर विपक्ष की सरकार करती तो भाजपा उनको देश विरोधी बता देती। 9 मई को प्रेस कांफ्रेंस में भी शहीदों के नाम नहीं बताए गए। कहा गया था कि कुछ हताहत हुए हैं। अब भी यह नहीं बताया जा रहा है कि हमारे छह जवान कहां पर शहीद हुई।
10 मई 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीज फायर का ऐलान किया था। 11 मई को डीजीएमओ की प्रेस कांफ्रेंस में पांच जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। किसी शहीद जवान का नाम नहीं बताया गया था। किसी घायल के अभी तक नाम नहीं बताए गए थे।पहले शहीद जवान के घर भीड़ पहुंचती थी और उनको श्रद्धांजलि दी जाती थी लेकिन यह सम्मान भी शहीद जवानों को नहीं मिला। शहीद जवानों के परिवार गुमनामी में हैं। देश के लोग परिवार का सम्मान नहीं कर पाए। जबकि पीएम मोदी ने पटना में विजय यात्रा निकाली थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि पाकिस्तान और इंडिया को व्यापार की धमकी देकर सीजफायर करा दिया है। उन्होंने करीब 70 बार यह बात कही लेकिन पीएम ने एक बार भी यह नहीं कहा कि ऐसा नहीं है। राहुल गांधी ने संसद में भी पीएम को चुनौती दी थी एक बार साहस कर बो
ल दें कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार ने बलिदान को नकारने का काम किया। अब सरकार ने माना है कि शहादत हुई थी। संसद में झूठ बोला गया था कि किसी की क्षति नहीं हुई है। जानबूझ कर संसद को गुमराह किया गया था। इसी तरह सपा, आप, आरजेडी, टीएमसी आदि विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाएं हैं।




