
अजित पाण्डेय / वाराणसी। श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित ‘हिन्दू एकता शोभायात्रा’ ने पूरे शहर को भक्ति, उत्साह और एकजुटता के रंग में रंग दिया। यह भव्य आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि हिन्दू समाज को संगठित करने का सशक्त संदेश भी दे गया। वाराणसी की पवित्र धरती से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा मैदागिन चौराहे से निकलकरनीचीबाग,चौक, बासफाटक और दशाश्वमेध होते हुए चितरंजन पार्क तक पहुंची। यात्रा के दौरान ‘जय श्रीराम’ और ‘पवनसुत हनुमान की जय’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।विशेष आकर्षण रहा काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट क्रमांक 4 पर हुआ श्रीराम रचित शिव स्तुति का भावपूर्ण पाठ,जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक,धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में हिन्दू समाज की एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित होने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक प्रार्थना करते हुए “विश्वकल्याण हेतु भारत में रामराज्य की स्थापना” का संकल्प लिया गया। समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबालजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू धर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को विश्वभर में स्थापित करने का मार्ग दिखाता है और इसके संरक्षण के लिए समाज का संगठित होना आवश्यक है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का नामजप करें और राष्ट्र व धर्म के कार्य हेतु कम से कम एक घंटा समर्पित करें। यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि हिन्दू समाज की जागरूकता,एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरी जिसने हर सहभागी के मन में रामराज्य के संकल्प को और मजबूत कर दिया।




