
ग्रेटर नोएडा। इंडिगो के बाद अकासा एयर ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से परिचालन की तारीख का ऐलान कर दिया है। अकासा एयर ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा,16 जून से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बंगलूरू और नवी मुंबई के लिए प्रतिदिन उड़ानें शुरू कर रहे हैं। यह घोषणा करते हुए हमें बड़ी प्रसन्नता है। 16 जून की नोएडा से बंगलूरू के लिए फ्लाइट बुकिंग की जा सकती है। नोएडा से बंगलूरू तक का किराया 6169 रुपये है। वहीं कुछ अन्य शहरों के लिए भी परिचालन शुरू हो रहा है। इंडिगो की पहली उड़ान 15 जून की सुबह लखनऊ से नोएडा के लिए होगी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 15 जून को लखनऊ की पहली यात्रा होगी। नोएडा एयरपोर्ट से लखनऊ का किराया 4,981 रुपये तय किया गया था, सुबह 7 बजे पहली फ्लाइट होगी। वहीं नवी मुंबई के लिए सुबह 8:35 बजे फ्लाइट उड़न भरेगी। जिसका किराया 9,211 हजार रुपये है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का लोकार्पण हो चुका है।यहां घरेलू और कार्गो टर्मिनल बनकर तैयार है।प्रथम चरण में एयरपोर्ट को 1334 हेक्टेयर में पूरा किया गया है। इसमें 3900 मीटर लंबा पहला रनवे, यात्री टर्मिनल, एटीसी, कार्गो हब शामिल है। हाल ही में इंडिगो ने हवाई अड्डे से यात्री सेवा शुरू करने की घोषणा की है।जल्द ही अकासा और एयर इंडिया एक्सप्रेस की यात्री एवं कार्गो सेवाओं के शुरू होने की तारीख और फ्लाइट शेड्यूल भी घोषित हो जाएंगे।इससे दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को देश के प्रमुख शहरों जैसे नवी मुंबई, कश्मीर ,लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, जयपुर, बंगलुरू, अहमदाबाद, गोवा के लिए उड़ाने शुरू करने की तैयारी है।
जब से ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी ने हवाई अड्डे के सुरक्षा कार्यक्रम को मंज़ूरी दी है, तब से लोग उड़ान सेवाओं के शुरू होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह इंतज़ार आखिरकार 15 जून को इंडिगो की उड़ानों के शुरू होने के साथ खत्म हो जाएगा। इस बीच, एयरलाइंस और अन्य एजेंसियां हवाई अड्डे से यात्री सेवाओं के शुरू होने की उम्मीद में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए पूरी लगन से काम कर रही हैं। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में घने कोहरे,बहुत कम विजिबिलिटी और बारिश के दौरान भी विमानों की उड़ान और लैंडिंग हो सकेगी।हवाई अड्डे में इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) के सबसे हाई लेवल तकनीकि सिस्टम कैट थ्री का इस्तेमाल होगा। इस तकनीक के जरिए कम दृश्यता में भी सुरक्षित लैंडिंग कराई जाती है। आमतौर पर पायलट इस तकनीकि का इस्तेमाल तब करते हैं, जब उन्हें बाहर कुछ भी दिखाई न दे रहा हो और लैंडिंग के लिए पूरी तरह से उन्हें तकनीकि पर निर्भर होना पड़ता है।




