
पटना। बिहार प्रांत के सिवान जिले के चर्चित गीतकार मनोज भावुक को पटना के बापू सभागार में आयोजित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2026 में बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें भोजपुरी फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के गीतों के लिए दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें इम्पा (IMPA) के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रदान किया। अवार्ड प्राप्त करने के बाद मनोज भावुक ने भावुक स्वर में कहा कि भोजपुरी अवार्ड समारोहों की असली सार्थकता तब है, जब हम उन लोगों को भी याद करें जिन्होंने इस उद्योग की बुनियाद रखी। उन्होंने कहा कि केवल अपनी उपलब्धियों का उत्सव मनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पुरोधाओं का सम्मान भी ज़रूरी है जिनकी बदौलत आज यह मंच संभव हुआ है। “कल हम भी पुराने हो जाएंगे, असली खुशी तब होगी जब हमारे इस दुनिया में न रहने पर भी लोग हमारे काम के लिए तालियाँ बजाएँ,” उन्होंने कहा। मनोज भावुक ने यह सम्मान संगीतकार रजनीश मिश्रा को समर्पित करते हुए कहा कि फिल्मों से उन्हें बतौर गीतकार जोड़ने का श्रेय उन्हीं को जाता है। साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्माता निशांत उज्ज्वल के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
भोजपुरी सिनेमा में मनोज भावुक और रजनीश मिश्रा की जोड़ी कई यादगार गीत दे चुकी है। फिल्म ‘मेहंदी लगा के रखना’ का लोकप्रिय गीत “तोर बउरहवा रे माई”, फिल्म ‘मेहमान’ का “मेरे राम” और ‘आपन कहाये वाला के बा’ के गीतों ने भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी है। मनोज भावुक की पहचान भोजपुरी जगत में एक शालीन कवि, ग़ज़लकार, संपादक, फिल्म गीतकार और फिल्म इतिहासकार के रूप में है। भोजपुरी सिनेमा की गहरी समझ के कारण उन्हें अक्सर “भोजपुरी सिनेमा का इनसाइक्लोपीडिया” कहा जाता है। उनकी शोधपरक पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ में 2025 तक के भोजपुरी सिनेमा का इतिहास दर्ज है, जबकि ‘चलनी में पानी’ और ‘तस्वीर ज़िंदगी के’ उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। मनोज भावुक हमेशा स्वच्छ और गरिमापूर्ण भोजपुरी के पक्षधर रहे हैं और उन्होंने व्यावसायिक लाभ के लिए कभी भी द्विअर्थी या अश्लील गीत नहीं लिखे। वर्तमान में वे महुआ नेटवर्क में प्रोग्रामिंग हेड के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे ज़ी टीवी, न्यूज़18, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी और सारेगामापा जैसे प्रतिष्ठित मंचों से लेखक और प्रोजेक्ट हेड के रूप में जुड़े रहे हैं।




