
शीबू ख़ान/फतेहपुर। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के बहेरा सादात गांव में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल छा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार शिया समुदाय के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले और लोगों ने अपने रहबर की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस दौरान बहेरा सादात में बड़ी संख्या में लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर शोक व्यक्त किया। मार्च में बूढ़नपुर और अल्लीपुर सहित आसपास के गांवों के स्थानीय लोग, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। कैंडल मार्च गांव की मुख्य सड़कों से होता हुआ वरिष्ठ पत्रकार एवं साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी के आवास ‘आब्दी मंजिल’ पहुंचा। आब्दी मंजिल पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का पुतला जलाकर विरोध जताया। इस दौरान अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। प्रतिभागियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांति, एकजुटता और इंसाफ का संदेश दिया। शोक सभा को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद खादिम अब्बास जैदी ने कहा कि हमारे रहबर की शहादत हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने अत्याचार के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और कभी भी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया। उनकी शहादत रमज़ान जैसे पाक महीने में हुई है। हमारे रहबर ने यजीदियों से डट कर मुकाबला किया वो डरे नहीं, छिपे नहीं, सर नहीं झुकाया और शान से हंसते – हंसते शहादत पा ली, उनकी शहादत को दुनिया हमेशा याद रखेगी। वहीं साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने हमेशा अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत दुनिया को यह संदेश देती है कि जुल्म के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए उन्होंने इस्लाम के सिद्धांतों के अनुसार जीवन व्यतीत किया और अपने देश व इंसानियत के लिए संघर्ष करते हुए शहादत प्राप्त की। उनकी शहादत को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। ईरान के सुप्रीम लीडर हम सब के रहबर ने करबला की तर्ज़ पर जंग की उन्होंने कभी भी जंग में अपनी तरफ से पहल नहीं की बल्कि जंग का जवाब दिया है। जिस तरह से करबला में इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए और इंसानियत को क़ायम रखने के लिए हक़ की लड़ाई लड़ी, अपना भरा घर अल्लाह की राह में कुर्बान कर दिया और सर कटा दिया लेकिन सर नहीं झुकाया ठीक उसी तरह हमारे रहबर ने बातिल के आगे सर नहीं झुकाया, अपने मुल्क के लिए अपने घर वालों की कुर्बानी दे दी और जिस शान से लड़ाई लड़ी वो दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई है, इनकी शहादत ने दुनिया को फिर से पैगाम दिया है कि ज़ुल्म के आगे कभी मत झुकना, ज़ुल्म करने वाले से ज़्यादा ज़ालिम वो होता है जो ज़ुल्म का मुकाबला नहीं करता और ज़ुल्म सहने वाला भी ज़ालिम होता है।
मार्च के दौरान अमेरिका मुर्दाबाद – इजराइल मुर्दाबाद के लगे नारे
हमारे रहबर ने अपनी जिंदगी को ऐसे गुज़ारा है जैसा हमारा इस्लाम कहता है, मामूली से घर में रहना, ज़मीन पर सोना, मिट्टी के बर्तन में खाना ईरान का सुप्रीम लीडर हो कर इस्लाम के दायरे में जिंदगी गुज़ारना ये हर किसी के बस की बात नहीं है। 86 साल के एक मर्दे मुजाहिद ने इस्लाम की जंग अकेले लड़ी जबकि पूरी दुनिया और इस्लामी मुल्क ख़ामोशी और बेपरवाही की नींद में डूबे हुवे थे, इस उम्र में भी वो अटल रहे ना थके न झुके बल्कि सच की आवाज़ बुलंद की ये इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आने वाली पीढ़ियां हैरत और गर्व के साथ पढ़ेंगी। गौर तलब है कि इस शहादत में ईरान के सुप्रीम लीडर की 14 महीने की नवासी के साथ बेटी, एक बेटा, बहु और दामाद भी शामिल हैं। वैसे इस बर्बरता और ज़ुल्म के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन जारी और लोग इस ज़ुल्म और ज़्यादती की कड़े शब्दों में निंदा करता नजर आ रहा है और कई लोग इसे तीसरे विश्व युद्ध के आगाज़ की संज्ञा देते नजर आ रहे हैं।




