ट्रंप की फटकार, नफरती नेतन्याहू आए सकते में
ईरान ने भी इस्राइल की राजधानी समेत अन्य शहरों और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बरसाईं मिसाइलें

आसिफ हुसैन
इस्राइली प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू दुनिया भर में नफरत के सौदागर बने हैं। नेतन्याहू की वजह से ही अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हवाई हमले किए थे। इस युद्ध में ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ ही तमाम बड़े नेताओं और मिलिट्री अधिकारियों व 165 से ज्यादा स्कूली बच्चियां और स्टाफ को खोया। । इस युद्ध के दौरान ईरान ने इस्राइल पर तो मिसाइलों की बारिश कर उसके गुरूर को तोड़ दिया। साथ ही सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन, इराक, मिस्ऱ आदि देशों में अमेरिका के सैनिक अड्डों को भी मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया। इस जंग के दौरान अमेरिका और इस्राइल के साथ यूएस बेसों को भी भारी नुकसान हुआ। इस जंग में ईरान के साथ चीन और रूस ने खुलकर मदद की। इसकी वजह से इस्राइल और अमेरिका के कई जंगी जहाज तबाह हो गए और सैनिक भी मारे गए। बाद में कई देशों की कोशिश के बाद अमेरिका ने 8 अप्रैल 2026 को जंगबंदी का ऐलान किया। इस दौरान पाकिस्तान के इस्लामाबाद शहर में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चली। इस वार्ता में दोनों तरफ से कई ऐसी शर्तें लगाई गईं जो दोनों ही देशों को कुबूल नहीं हुईं। इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग हुर्मुज पर दोनों देशों की तरफ से नाकाबंदी जारी रही। अमेरिका ने ईरान की कई नौकाओं को निशाना बनाया तो ईरान ने भी अमेरिका के समुद्री जहाजों को निशाना बनाया। जंगबंदी के दौरान भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रोज धमकी भरे मैसेज सोशल मीडिया अकाउंट X पर आते रहे। वह कभी ईरान का सब कुछ तबाह करने का दावा करते रहे तो कभी परमाणु बम बनाने के काम आने वाली यूरेनियम को नष्ट करने की बात कहते रहे। कई बार उन्होंने जल्द ही समझौता होने की भी बात की लेकिन इस दौरान ईरान ने समझौता वार्ता में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई और न ही अमेरिका के दबाव में आया। खास बात यह रही कि इस समझौता वार्ता से इस्राइल को दूर रखा गया। पाकिस्तान के बाद सऊदी अरब, कतर भी समझौता कराने के लिए आगे आए। समझौता वार्ता की बात चलती रही लेकिन नफरती नेतन्याहू अपनी चालों से बाज नहीं आया। वह बराबर लेबनान की आबादी वाले क्षेत्रों पर हवाई हमले कराता रहा। जबकि समझौते में यह भी शर्त रखी गई थी कि इस्राइल लेबनान के साथ गजा पर भी हमले नहीं करेगा। हाल ही में इस्राइल ने लेबनान पर हमले तेज कर दिए और सलाहउद्दीन अय्यूबी के ऐतिहासिक किले पर भी कब्जा कर लिया। इस पर ईरान भड़क गया। उसने शांति वार्ता रोककर ताबड़तोड़ इस्राइल की राजधानी तेल अवीव समेत कई शहरों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोल दिया।
नेतन्याहू की हरकतों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उनके ही देश में साख गिरने लगी। पत्रकार ट्रंप से सवाल पूछने लगे कि इस्राइल के समर्थन में अमेरिका क्यों जंग में कूदा? यहां तक कि अमेरिकी संसद कांग्रेस में भी जंग के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो गया। ट्रंप के साथ ही सेक्रेटरी आफ स्टेट मार्को रूबियो की प्रेस कांफ्रेंस में भी विरोध का सामना करना पड़ा। एक पत्रकार ने कहा कि हम क्यों इस्राइल के नरसंहार का समर्थन कर रहे हैं। हुर्मुज स्टेट पर नाकाबंदी से पूरी दुनिया में एनर्जी का संकट पैदा हो गया। इसका असर अपने देश पर भी पड़ा है। यहां पर भी पेट्रोल. डीजल और गैस के दाम बढ़ गए हैं। ट्रंप ने चीन का दौरा कर भी राष्ट्रपति शी जिंपिंग को ईरान का समर्थन न करने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन चीन का ईरान के प्रति पालिसी में कोई बदलाव नहीं आया। सभी की कोशिश से शांति समझौते के करीब पहुंचने से पहले ही इस्राइल की हरकत से मामला बिगड़ गया। इस पर ट्रंप भी इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि इसी वजह से पूरी दुनिया इस्राइल से नफरत कर रही है। तुम पूरी तरह से पागल हो गए हो। इस्राइल के खिलाफ इस्लामिल देशों के साथ सभी यूरोपीय देशों में गुस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अरब देशों को अब्राहम अकार्ड में शामिल होने के लिए मनाने की भी कोशिश की लेकिन किसी भी देश ने इस्राइल के साथ समझौता करने से साफ इनकार कर दिया। इससे भी अमेरिकी राष्ट्रपति नेतन्याहू से काफी नाराज हैं। इस फटकार के बाद नेतन्याहू ने लेबनान पर हमले तो रोक दिए हैं। उन्होंने सेना भी वहां से वापस बुला ली है लेकिन इसका असर कितने दिन दिखेगा। यह आने वाला वक्त बताएगा। अगर इसके बाद भी नेतन्याहू नहीं सुधरे तो उनको भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है क्योंकि जंग से अब इस्राइली भी तंग आ चुके हैं। 2023 अक्तूबर से ही इस्राइल जंग में है। उसने गजा को खंडहर बनाने के बाद लेबनान और ईरान को भी खंडहर में तब्दील करने का मनसूबा बनाया था। इसीलिए उसने अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान पर दो तरफरा हमले के लिए राजी किया था लेकिन इस बार उसका दांव उलटा पड़ गया। ईरान ने इस्राइल के साथ ही अमेरिका की भी हेकड़ी निकाल दी है। पूरी दुनिया में ईरान की जीत का मैसेज चला गया है। इसलिए अब सुपर पावर अमेरिका को भी अपनी इस्राइल के प्रति नीति बदलनी होगी। अमेरिका में यहूदी लॉबी पर लगाम लगानी होगी। यही उसके भविष्य के लिए अच्छा भी होगा। उम्मीद है कि जल्द ही अमेरिका और ईरान में समझौता होगा और यह जंग खत्म होगी। जंग बंद होने के बाद पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट दूर होगा। और विश्वभर में आर्थिक संकट को बादल भी छंट जाएंगे।




