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मऊ

मऊ:तीन दशकों से विश्व बंधुत्व और आध्यात्मिक जागरण का अलख जगा रहे अनिल मिश्र

नगर पंचायत अध्यक्ष ने किया सम्मानित

सतीश कुमार पांडेय
घोसी, मऊ|आज के समय में जब संसार भौतिकता और वैमनस्य की ओर बढ़ रहा है, ऐसे दौर में कोई एक व्यक्ति लगातार 30 वर्षों तक अगर विश्व बंधुत्व, एकता, शांति और आध्यात्मिक जागरण का दीप जलाता रहे, तो वह समाज के लिए प्रेरणा का जीवंत स्रोत बन जाता है।
ऐसे ही हैं श्री अनिल कुमार मिश्र एडवोकेट, जो पिछले तीन दशकों से “सोचो तुम ही ईश्वर हो”, “विश्व शांति का आधार”, और “जागो-जगाओ, सुंदर संसार बनाओ” जैसे मूल मंत्रों के माध्यम से देश-विदेश में भारतीय आध्यात्मिक चिंतन और विश्व समरसता का संदेश फैला रहे हैं। 5 अक्टूबर को मना विश्व बंधुत्व एकता दिवस*
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 5 अक्टूबर को “विश्व बंधुत्व एकता दिवस” बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे श्री अनिल कुमार मिश्र, जिनका न सिर्फ़ भाषण जनमानस को प्रेरित कर गया, बल्कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन के लिए भी प्रेरित कर गया।
सम्मान में मिला अंगवस्त्र
घोसी के नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मुन्ना प्रसाद गुप्त ने श्री अनिल कुमार मिश्र को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “अनिल कुमार मिश्र जैसे लोग समाज के सच्चे पथप्रदर्शक हैं। जब हम अपने आत्मबोध और सांस्कृतिक मूल्यों से भटक रहे हैं, तब इन्होंने निःस्वार्थ भाव से समाज को जोड़ने, जागरूक करने और दिशा देने का कार्य किया है।”
जनसमूह की उपस्थिति ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव
कार्यक्रम में क्षेत्र के कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें अनिरुद्ध सिंह, विनोद राय, कर्मनाथ राय सहित सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने अपनी भागीदारी निभाई। सभी ने श्री मिश्र के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आज के युग में ऐसा निरंतर और निष्कलंक सेवा भाव बहुत दुर्लभ है।
एक मिशन, जो थमा नहीं…
श्री अनिल कुमार मिश्र न सिर्फ़ एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, बल्कि एक आध्यात्मिक विचारक, सामाजिक चेतना के संवाहक और मानवीय मूल्यों के प्रचारक भी हैं। उनका अभियान केवल भारत तक सीमित नहीं है, उन्होंने वैश्विक मंचों पर भी भारतीय अध्यात्म, वेदांत और मानव एकता का संदेश पहुँचाया है।वे मानते हैं कि “हर व्यक्ति में ईश्वर है, बस आवश्यकता है उसे पहचानने और जागने की। जब व्यक्ति जागेगा, तभी समाज और संसार सुंदर बन सकेगा।”आज जब समाज टुकड़ों में बंटा हुआ है, तब श्री अनिल कुमार मिश्र जैसे लोग विश्व बंधुत्व, एकता और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की मशाल थामे चल रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व का सम्मान केवल किसी एक संस्था द्वारा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज द्वारा किया जाना चाहिए। क्योंकि जब तक ऐसे प्रेरणास्त्रोत जीवित हैं, तब तक मानवता की लौ बुझ नहीं सकती।

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