BHU:हिंदी ग़ज़ल पर त्रिदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य उद्घाटन

हमने जो सीखा इसकी आलोचना हमको सुनने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए: कुलपति
सुशील कुमार मिश्र/ वाराणसी।हिंदी विभाग,काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में ग़ज़ल,हिंदी ग़ज़ल:समाज, दर्शन, इतिहास और संगीत’ विषय पर हिंदी विभाग के आचार्य रामचंद्र शुक्ल सभागार में त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज किया गया। कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य एवं विषय प्रवर्तन हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ‘अनूप’ ने किया। इस अवसर पर आलोचन दृष्टि पत्रिका के वशिष्ठ अनूप की ग़ज़लों पर केंद्रित अंक का विमोचन किया गया।उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि हर विभाग में इस तरह की व्यापक संगोष्ठी का अधिकाधिक आयोजन किया जाना चाहिए। जब एक साथ इतने विद्वान एकत्रित होते हैं तो हम अवश्य ही लाभान्वित होते हैं । साथ ही उन्होंने कहा कि हमने जो सीखा है इसकी आलोचना सुनने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। लगनशील विद्यार्थियों से शिक्षकों को ऊर्जा मिलती है इसलिए हिंदी में नवाचार को बढ़ावा दिया जाए। भोपाल से आए सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं आलोचक आलोक कुमार त्यागी ने हिंदी ग़ज़ल की संघर्षयात्रा की ओर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बड़े उद्देश्यों के लिए हमें बड़ी आहुतियाँ देनीं पड़ती हैं, बहुत कीमतें चुकानी पड़ती हैं। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सांगीतिक संध्या के अंतर्गत विशाल राव, राघवेंद्र शर्मा, भूपेंद्र कुमार, और डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने ग़ज़लों का मनोहर गायन किया। कार्यक्रम संचालन डॉ. सत्यप्रकाश पॉल और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अशोक कुमार ज्योति किया। कुलगीत गायन दिव्या शुक्ला, स्मिता पाण्डेय, आकांक्षा मिश्रा, अपराजिता श्री ने किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों,भारत के कई प्रांतों और काशी के महत्वपूर्ण विद्वान तथा ग़ज़लकार उपस्थित थे। कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, शोधार्थी और छात्र छात्राएँ शामिल रहे।




