लखनऊ : निवेशकों का ध्यान पूर्वांचल व बुंदलखंड पर कम क्यों?

chief editor Hindustan Sandesh
Ashok Kumar Mishra
उत्तर प्रदेश सरकार के आला अधिकारी इस बात की जानकारी करने में जुट गए हैं कि निवेशकों का ध्यान पूर्वांचल व बुंदलखंड पर कम क्यों है जबकि उनको उद्योग लगाने के लिए सुविधाएं ठीक से दी जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बुंदेलखंड और पूर्वांचल को निवेश के मामले में अग्रणी क्षेत्र के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही है जबकि इसके विपरीत इस क्षेत्र में निवेशकों का रुझान अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम होता जा रहा है। पूर्वांचल व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी निवेशकों ध्यान इस तरफ ठीक से नहीं खींच पा रहा है। पश्चिमांचल के विभिन्न जिलों में जहां 2815 निवेश परियोजनाओं के प्रस्ताव आए हैं वहीं मध्यांचल के लिए 476 प्रस्ताव निवेशकों ने दिए हैं जबकि बुंदेलखंड के लिए 111 और पूर्वांचल के लिए 374 परियोजनाओं के प्रस्ताव उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को प्राप्त हुए हैं। बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए सरकार ने 22,494 करोड़ रुपये से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और 14,850 करोड़ रुपये खर्च कर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया है। इसके अलावा 5876 करोड़ रुपये की लागत से गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे भी तैयार कर दिया गया है। पूर्वांचल व बुंदेलखंड के शहरों में सरकार ने ज्यादा से ज्यादा वैश्विक क्षमता केंद्रों को स्थापित करने की योजना तैयार की है, लेकिन निवेशकों का रुझान पश्चिमांचल की तरफ ज्यादा है। नोएडा में तैयार नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर भी ज्यादातर निर्यातक पश्चिम में ही निवेश में रुचि ले रहे हैं। बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निवेश बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सबसे कम ₹2000 प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड उपलब्ध करा रही है जबकि मध्यांचल में 2500 और पश्चिमांचल में तीन हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। इन्वेस्ट यूपी की टीमें बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निवेशकों को सरकार की तरफ से दी जा रही विभिन्न प्रकार की सुविधाओं की जानकारी दे रही हैं।
इस बार प्रस्तावित जीबीसी में पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य औद्योगिक विकास विभाग ने तय किया है। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है। सरकारी नीतियों में सुधार, तेज़ी से विकसित होता परिवहन नेटवर्क और निवेशकों को मिलने वाली पारदर्शी सुविधाओं ने यूपी को देश के अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में शुरू किए गए मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अब जमीन पर दिखने लगे हैं। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बताया जा रहा है। 6 सक्रिय हवाई अड्डों के साथ 10 नए एयरपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया जारी है। तेज़ कनेक्टिविटी निवेशकों को आकर्षित करने का सबसे बड़ा आधार बन रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर में बड़ा उछाल आया है। नोएडा–ग्रेटर नोएडा–यमुना प्राधिकरण क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।मोबाइल उत्पादन में यूपी देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो चुका है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने राज्य में नई इकाइयाँ स्थापित की हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर भी गति पकड़ रहा है। अलीगढ़, कानपुर, झांसी, चित्रकूट और लखनऊ में रक्षा उत्पादन से जुड़े उद्योग तेजी से विस्तार कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में यूपी देश का प्रमुख रक्षा उपकरण विनिर्माण राज्य बन सकता है। अयोध्या, काशी, मथुरा–वृंदावन और प्रयागराज में धार्मिक पर्यटन तेज़ी से बढ़ा है।राम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद होटल, ट्रैवल, परिवहन और टूरिस्ट सेवाओं में हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में यूपी आने वाले समय में देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हो सकता है।उत्तर प्रदेश का ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट) मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। पीतल, कांच, लकड़ी, कालीन, लेदर और हैंडलूम उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों में मांग बढ़ रही है। सरकार द्वारा एमएसएमई को आसान ऋण, प्रशिक्षण और मार्केट लिंकिंग सहायता मिलने से छोटे उद्योगों का उत्पादन और रोजगार तेजी से बढ़ रहा है। स्टार्टअप नीति के तहत यूपी में 50 से अधिक इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं।फिनटेक, एग्रीटेक, एआई और रोबोटिक्स आधारित स्टार्टअप्स को सरकारी सहायता मिल रही है। लखनऊ, नोएडा और कानपुर आईटी सेक्टर के नए हब बनते दिख रहे हैं।सिंगल विंडो सिस्टम, उद्योग-हितैषी नीतियाँ, बेहतर कानून-व्यवस्था व विशाल उपभोक्ता बाजार के कारण निवेशकों को यूपी पसंद आ रहा है।सरकार का लक्ष्य यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाना है। जेवर एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी और डिफेंस कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में निवेश और रोजगार को नई ऊंचाई देंगे। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्तमान रफ्तार बनी रही, तो उत्तर प्रदेश आने वाले दशक में भारत के सबसे बड़े औद्योगिक राज्यों में शामिल हो जाएगा।
प्रदेश सरकार ने व्यापार को सुगम बनाने के लिए आठ पुराने कानूनों में बदलाव करते हुए आपराधिक धाराओं को हटाकर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य कई प्रक्रियाओं को डिजिटली सरल बनाना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को जमीनी स्तर पर लागू करना है। नगर निगम अधिनियम, नगर पालिका अधिनियम, औद्योगिक विकास अधिनियम, यूपी स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट और उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास अधिनियम में भी इसी तर्ज पर संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों से व्यवसायियों को गैर-आपराधिक प्रकृति के मामलों में राहत, समय की बचत और न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम होगा। यह कदम राज्य को व्यापार-अनुकूल वातावरण देने की दिशा में मजबूत प्रयास माना जा रहा है।




