सर मार्क टली: एक रोल मॉडल और युवा पत्रकारों के लिए अमिट विरासत

@- शाश्वत तिवारी
मार्क टली चले गए, लेकिन पत्रकारिता को देखने का उनका नज़रिया हमेशा ज़िंदा रहेगा। BBC के मशहूर पत्रकार मार्क टली अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सच्चाई से भरी आवाज़ हमेशा हमारे कानों में गूंजती रहेगी। वे सिर्फ़ एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता के जीवंत मूल्य थे। साहस, ईमानदारी, विनम्रता और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम। मार्क टली का भारत से रिश्ता केवल पेशेवर नहीं था, वह भावनात्मक था। उन्होंने भारत को सिर्फ़ देखा नहीं, समझा। गांवों की गलियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक, उनकी नज़र हर जगह समान रूप से पैनी और निष्पक्ष रही। यही कारण था कि उनकी रिपोर्टिंग में शोर नहीं, बल्कि विश्वसनीयता होती थी। जो भी एक बार मार्क टली से मिला, वह उनका मुरीद हो गया। उनका व्यवहार उतना ही सरल था जितनी उनकी भाषा। बड़े से बड़ा विषय हो या आम आदमी की पीड़ा, वे हर बात को मानवीय दृष्टि से रखते थे। आज के दौर में, जहाँ पत्रकारिता अक्सर अहंकार और जल्दबाज़ी का शिकार हो जाती है, वहाँ मार्क टली की विनम्रता अपने आप में एक सबक है। मार्क टली का जीवन और कार्य युवा पत्रकारों के लिए एक खुली किताब है। उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
उन्होंने कभी जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकाले। तथ्य, संदर्भ और संतुलन उनकी पत्रकारिता की नींव थे। वे चिल्लाकर नहीं, बल्कि तथ्यों और समझ से सुने जाते थे। एयर-कंडीशन्ड स्टूडियो से नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत से खबर निकालना उनकी पहचान थी। उन्होंने कभी खुद को खबर से बड़ा, नहीं बनने दिया। जिन पर खबर की, उनका सम्मान हमेशा बनाए रखा। मार्क टली पत्रकारों के लिए सिर्फ़ एक रोल मॉडल नहीं थे, वे एक नैतिक दिशा-सूचक थे। आज जब पत्रकारिता पर सवाल उठते हैं, तब मार्क टली जैसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि, यह पेशा (पत्रकारिता) सत्ता का नहीं, सच और समाज का साथी बनने के लिए है। उनकी कमी, कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन अगर युवा पत्रकार उनके मूल्यों को अपनाएं, तो यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।



