गाजीपुर:आज कमाने में रोटी है सरक जाती लंगोटी,आज भाई को कहां खिला पा रहा है रोटी…

गाजीपुर। नगर के स्वामी विवेकानंद कॉलोनी में साहित्य चेतना समाज’ के तत्वावधान में ‘चेतना -प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत कई श्रेष्ठ काव्य संग्रहों की रचयिता, दसाधिक पुरस्कार-सम्मानों से सम्मानित कवयित्री अलका त्रिपाठी ‘विजय’ के आगमन पर एक सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया। युवा शायर गोपाल गौरव ने अपनी ग़ज़ल “ज़िन्दगी में ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी के वास्ते/हम भटकते ही रहे इक रौशनी के वास्ते/प्यार ही बस प्यार हो ऐसी कोई तरकीब कर/गोलियाॅं,बारूद मत रख आदमी के वास्ते” सुना कर खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में आशुतोष श्रीवास्तव ने अपनी व्यंग्य- कविता ”आज कमाने में रोटी है सरक जाती लंगोटी/आज भाई को भाई कहाॅं खिला पा रहा है रोटी ” सुना कर सोचने पर मजबूर किया। युवा नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने अपना नवगीत “झिलिंगी खटिया पर कोने में सोने लगे पिता/धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे पिता” की सस्वर प्रस्तुति ने श्रोताओं को तालियाॅं बजाने के लिए विवश किया। संस्था के संस्थापक एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ने अपनी कविता “आगे बढ़ते उत्साही को/कब रोक सकीं दुर्गम राहें/मंज़िल ख़ुद उसे बुलाती है /फैला करके दोनों बाहें” खूब प्रशंसित हुई। संजय पाण्डेय ने अपना गीत “आ तुझे मैं प्यार करूॅं और तू कुछ ना बोले” ने प्रशंसा अर्जित किया। भोजपुरी एवं हिन्दी के गीतकार हरिशंकर पाण्डेय अपना भोजपुरी गीत “कहनी शुरू बाटे, बेटी बेटी-महतरिया/रोटिया बनीं कहिया हो/होत भिनसरवे घनघनाएले मोबाइल/काम-धाम छोड़ि के धियवो पराइल” प्रस्तुत कर ख़ूब तालियाॅं बटोरी।
इसी क्रम में कन्हैया गुप्त ‘विचारक’ ने अपनी कविता “पापा जी की परी है प्यारी/जिद्द अपनी मनवाती है/जिद्द करके पापा जी से/मोबाइल मंगवाती है” पर खूब वाहवाही लूटी। वीर रस के वरिष्ठ कवि दिनेशचन्द्र शर्मा ने “रात कब ढल गई सितारों से पूछो/लहरें कितना मचलतीं हैं किनारों से पूछो”सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया।नगर के वरिष्ठ ग़ज़ल-गो कुमार नागेश की ग़ज़ल “कभी कहा था किसी से मेरा ऐतबार करो/मैं चाहता हूॅं तुम्हें, तुम भी मुझे प्यार करो” ने खूब प्रशंसा अर्जित की। इस कार्यक्रम केन्द्रीय व्यक्तित्व श्रीमती अलका त्रिपाठी ‘विजय’ ने अपनी कई कविताऍं प्रस्तुत की, वर्तमान वैश्विक सामरिक स्थिति पर रचित गीत “अब समर की कहानी लिखी जाएगी/हर अमर की कहानी लिखी जाएगी” विशेष प्रशंसित रहा।अन्त में इस गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे नगर के वरिष्ठ महाकाव्यकार कामेश्वर द्विवेदी ने अपनी छान्दस कविता “आओ ब्रजराज फिर एकबार आज,धरा/स्वर्ग-सा बना के जाओ असुर संहार के” सुना कर खूब प्रशंसा पायी। इस कवि-गोष्ठी की अध्यक्षता कामेश्वर द्विवेदी एवं संचालन डॉ.अक्षय पाण्डेय ने किया। संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने आगंतुक कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।




