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गाजीपुर

गाजीपुर : हिंदू धर्म में घर वापसी का मार्ग स्वामी श्रद्धानंद ने शुद्धि आंदोलन से खोला – आदित्य

गाजीपुर। भारतीय संस्कृति का पोषक एवं जनपद का सबसे प्राचीन विद्यालय  “दयानंद एंग्लो वैदिक “डी .ए.वी. इण्टर.कॉलेज गाजीपुर के सभागार में आर्य समाज के प्रमुख संत, राष्ट्रवादी चिंतक तथा प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद का 99 वां बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अपना उद्बोधन देते हुए विद्यालय के प्रबंधक एवं आर्य उप प्रतिनिधि सभा गाजीपुर के जिला प्रधान आदित्य प्रकाश आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद बीसवीं सदी के चमत्कारी व प्रेरक व्यक्तित्व थे। वह देश और धर्म पर सर्वस्व अर्पित करने वाले बलिदानी पुरुष थे। उन्होंने 1902 में वैदिक शिक्षा के प्रसार के लिए “गुरुकुल कांगड़ी” की स्थापना की। अपने समय के वह सर्वाधिक लोकप्रिय नेता थे। वह दिल्ली के बेताज बादशाह थे। देश -धर्म की सेवा के लिए उन्होंने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी । अंग्रेजों के काला कानून “रोलेट एक्ट” जिसे बिना वकील, बिना दलील वाला एक्ट कहा जाता था। उसके विरोध में 1919 में उन्होंने एक जुलूस निकाला। जिसे अंग्रेजों के संगीन भी नहीं रोक पाए।

मुस्लिम समुदाय के आग्रह पर उन्होंने जमा मस्जिद में उद्बोधन दिया था । उन्होंने स्वर्ण मंदिर में भी संबोधन किया था। सांप्रदायिक सौहार्द के वे अग्रणी नेता थे । वह अंग्रेजी बंदूकों से भी नहीं डरते थे और उन्हें अंग्रेजी बंदूकों के सामने अपने सीने को खोलने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने दलितों को सभी सामाजिक और धार्मिक अधिकार दिलवाएं और उन्हें मुसलमान होने से रोका और जो मुसलमान हो गए थे उन्हें शुद्धि आंदोलन के माध्यम से घर वापसी कराया। 23 दिसंबर 1926 के दिन ही दिल्ली में उनके निवास पर बीमारी की अवस्था में एक मतान्ध मुसलमान अब्दुल रशीद ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।


इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापक डां. संतोष कुमार तिवारी ने कहा की स्वामी श्रद्धानंद आर्य समाज के महान संत और राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे ।उनका जीवन शिक्षा, स्वाधीनता तथा वैदिक धर्म के प्रचार- प्रसार के लिए समर्पित था। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने उन्हें “दलितों का सबसे बड़ा मसीहा” कहा है। महात्मा गांधी उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानते थे। उन्होंने भारत को लोक अदालतों का विचार दिया । उन्होंने भारतीय स्वामित्व में पहला राष्ट्रीय स्तर का दैनिक अखबार प्रकाशित किया। वह एक उच्च कोटि के अधिवक्ता भी थे। वे स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य थे। इस अवसर पर छात्रों को स्वामी श्रद्धानंद पर आधारित फिल्म “आवाहन” भी दिखाई गई। इसके पश्चात स्वामी श्रद्धानंद के जीवन से संबंधित एक  सामान्य -ज्ञान प्रतियोगिता भी हुई ।इस अवसर पर विद्यालय के सभी प्रवक्ता और शिक्षक -गण और कर्मचारी- गण उपस्थित रहे । कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य समाज गाजीपुर के पुस्तकाध्यक्ष श्री रवीश कुमार आर्य ने किया तथा सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्रधानाचार्य हरिशंकर ने किया।

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