जोगियों के और मटरू के अलम के जुलूस निकले
जुलूस के दौरान अल्लाह हु अकबर, या हुसैन की सदाएं गूंजरी रहीं शियाओं ने मजलिसों में इमाम हुसैन की शहादत बयान की
कानपुर। पैगंबर-ए- इस्लाम (सअ) के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में तकिया बेकनगंज से शाह बिरादरान (जोगियों) के अलम का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया। नीली पोश रोड कर्नलगंज से मटरू के अलम का जुलूस भी निकला। शहर के 5 हजार इमामबाड़ों में मजलिसे अजा के बाद महिलाओं ने मन्नते मानी बच्चों को लाल व हरा कलावा पहनाकर इमाम हुसैन का फकीर भी बनाया।
कानपुर में मोहर्रम की 5 तारीख पर 154 बरस से शाह बिरादरान (जोगी बिरादरी) के तत्वावधान में उठाने वाले अलम का जुलूस 3 बजे मोहम्मद आरिफ और अहमद चौधरी के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। अहमद चौधरी ने बताया कि यह जुलूस अवध के नवाब वाजिद अली शाह के जमाने से हमारी बिरादरी उठा रही है। यह जुलूस तकिया बेकनगंज शौकत अली पार्क से उठकर कंघी मोहाल, कर्नलगंज, चूड़ी मोहाल, यतीमखाना रोड, दादामियां चौराहा, पेंचबाग, नई सड़क, मूलगजं, कुली बाजार, कोपरगंज, डिप्टी का पड़ाव, बासमण्डी से इफ्तिखाराबाद, दलेलपुरवा, टुकनियापुरवा फहीमाबाद, हलीम कालेज, मोहम्मद अली पार्क, नाला रोड, गुलाब घोसी की मस्जिद होता हुआ वापस रात 10 बजे कर्नलगंज पुराना तकिया पहुंचकर समाप्त हुआ । शाह बिरादारान ने 85 अलम और पटके नए बनवाए। अलम के पीछे दर्जनों बच्चे हरे लाल रंगों की पोशालों में नारे हुसैनी लगा रहे थे। दर्जनों घोडों पर लोग अरबी पोशाल में बैठे थे। जुलूस में लोग अल्लाह हु अकबर और या हुसैन के नारे लगा रहे थे। पुलिस व्यवस्था चुस्त व दुरूस्त थी।
जुलूस के रास्तों में स्वागत करने वालों का भारी हुजूम था। महिलाएं भी घरों से अलम और ताजिये का दीदार कर रही थीं। ठेलों पर पुलाव और जर्दे का तबर्रुक वितरित किया जा रहा था। जुलूस का जगह-जगह कर्बला के प्यासे शहीदों के नाम पर चाय और पानी पिलाकर अकीदतमन्द इस्तकबाल कर रहे थे। दूसरी तरफ नीली पोश रोड कर्नलगंज से यादे हुसैन में मटरू का अलम जुलूस शाम 4 बजे अन्जुमन शरियते रसूल नौजवान कमेटी के तत्वावधान में निकाला गया जिसका नेतृत्व मुन्ने नवाब व पप्पू कुरैशी कर रहे थे।जुलूस अपने कदीमी रास्तो से होता हुआ वापस नीली पोश रोड पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
उधर शहर के 5 हजार इमामबाड़ों में मजलिसे अजा के बाद ख्वातीन ने बच्चों को मन्नती हरा-लाल कलावा पहनाया और इमाम हुसैन का फकीर भी बनाया। डा.ज़ुल्फ़िकार अली रिज़वी ने बताया कि यादे हुसैन का सिलसिला पहली मोहर्रम से बराबर जारी है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन पैगम्बरे इस्लाम के नवासे और जवानाने जन्नत के सरदार हैं और इस्लाम की बका के जिम्मेदार हैं। वह भला यजीद की बयअत कैसे कर सकते थे। यजीद फासिक और फाजिर था।
बड़ी कर्बला नवाब गंज की मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना अबूज़र काज़मी ने जनाबे जैनब के दो बेटों औन व मोहम्मद की बहादुरी और शहादत इस तरह बयान की जिससे मजलिस में मौजद लोगों की आखों से आंसू छलक पड़ें।
इसी तरह शहर की मजलिसो को हुसैनी वक्ता मौलाना बशीर हैदर, मौलाना इंतेखाब आलम ,मुनव्वर हुसैन, और फिरोज अब्बास ,सम्बोधित कर रहे हैं इमाम बारगाह नवाब बब्बन कर्नलगंज में भी मजलिसों का सिलसिला जारी है। शहर की मजलिसों में ,डा० जुल्फिकार अली रिज़वी,पप्पू मिर्जा, अली अख़्तर रिज़वी,मुजिबुल हसन रिज़वी, आसिफ़ अब्बास ,रानू नकवी, सैयद क़मर मेहदी, ज़िया मेंहदी, मंजर हुसैन,डा.अयाज़ हैदर रिज़वी, फुरकान हैदर रिज़वी, आसिफ़ रिज़वी मुंतजिर हसन ,एहसान हुसैन, नज़रे आलम,और ताज मिर्ज़ा, इब्ने हसन ज़ैदी, अफ़सर हुसैन मौजूद रहे।


