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धर्म

‘ज़िल्लत की ज़िंदगी से इज़्ज़त की मौत बेहतर’

जब दीन और इंसानियत पर हमला हो तो खामोशी नहीं, बल्कि कुर्बानी देना ईमानी रवैया है, मोहर्रम की चार तारीख को शहर में निकाला गया अलम का जुलूस

कानपुर। मोहर्रम की चार तारीख को शहर की इमामबाड़ों, मस्जिदों, कर्बलाओं, खानकाहों और मुसलमानों के घरों में बने इमामबारगाहों में मजलिसे अज़ा, इमाम चौकों पर जिक्रे शहादतैन और कुरानख़्वानी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। इस दौरान शहर में अलम का जुलूस निकाला गया।

इमामबाड़ा सज्जादी हाल की मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना नुसरत आबिदी ने कहा कि यज़ीद नुमाइंदा था फिरऔन, शद्दाद, नमरूद, अबू लहब और अबू जहल का, जबकि हज़रत इमाम हुसैन अ.स. नुमाइंदे थे हज़रत आदम, हज़रत नूह, हज़रत मूसा, हज़रत ईसा और ताजदारे अंबिया हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (सअ) के।

मौलाना ने आगे कहा कि कर्बला का मैदान वह मुक़द्दस सरज़मीन है जहाँ हज़रत इमाम हुसैन अ.स. ने अपने अहले बैत और 72 जानिसारों के साथ इस्लामी उसूलों, इंसाफ़ और हक़ की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी और इस्लाम का परचम क़यामत तक के लिए बुलंद कर दिया। उन्होंने कहा कि ज़िल्लत की ज़िंदगी से इज़्ज़त की मौत बेहतर है। यही हुसैनी पैग़ाम है, जो हर दौर के लिए मशअलए राह है। वाक़याते कर्बला हमें सिखाता है कि सच्चाई पर डटे रहना सब्र और इस्तेक़ामत अपनाना ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय आवाज़ बुलंद करना

कर्बला सिर्फ एक तारीख़ नहीं, बल्कि एक जिंदा पैग़ाम है जो बताता है कि जब दीन और इंसानियत पर हमला हो  तो खामोशी नहीं, बल्कि कुर्बानी देना ईमानी रवैया है।

मजलिस-को-खिताब-करते-मौलाना-नुसरत-आबिदी।

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मजलिस से पहले शायरों ने बारगाहे हुसैनी में मन्ज़ूम अशआर का नजराना पेश किया।

दुनिया भी है हुसैन की, जन्नत हुसैन की,

जन्नत का रास्ता है मोहब्बत हुसैन की।”

मजलिसों में नवाब मुमताज़, क़ासिम अब्बास, अदीब आज़मी,पप्पू मिर्जा, असर कानपुरी, ताज कानपुरी, परवेज़ जैदी, हसन आबिदी , एहसान हुसैन, जवाज हैदर, डॉ अयाज़ हैदर, नज़ीर हैदर, फुरक़ान हैदर रिज़वी सहित कई अकीदतमंद मौजूद रहे।, उधर शहर में अलम का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में शहर की तमाम अंजुमनों ने शिरकत की। जुलूस में नौजवानों के साथ बच्चे भी शामिल रहे। जुलूस के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने लंगर भी किया।

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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