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एजुकेशनवाराणसी

काशी विद्यापीठ: शैक्षिक नेतृत्व एवं व्यवस्था पर विशेषज्ञों ने की चर्चा

मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित मल्टीडिसिप्लिनरी रिफ्रेशर कोर्स का दूसरा दिन

डॉ शिव यादव
वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, शिक्षाशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित मल्टीडिसिप्लिनरी रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन मंगलवार को प्रथम सत्र में प्रबंध संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. सुजीत कुमार दूबे ने शैक्षिक नेतृत्व पर अपना विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत में कोई भी व्यक्ति जो किसी खास कार्य के लिए जिम्मेदार है वह एक अकादमिक लीडर है, परन्तु दुर्भाग्य यह है कि व्यक्ति केवल सफलता का श्रेय लेना चाहता जबकि असफलता की जिम्मेदारी अन्य पर आरोपित करना चाहता है। उन्होंने बताया कि नेतृत्व में विजन, ईमानदारी, सामानुभूति, संप्रेषण एवं उत्तरदायित्व जैसे तत्वों का समावेश होता है। वास्तविक नायक के दुर्लभ गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि ईमानदारी, आत्म जागरूक, मौलिक, संवेदनात्मक बुद्धि, विनम्र, नैतिक, लक्ष्य केंद्रित एवं सृजनात्मक होना आवश्यक है। उन्होंने निर्णय निर्माण, समदर्शी संप्रेषण, नवाचार, सामवेगिक बुद्धि, सकारात्मक एवं समूह सशक्तीकरण आदि के माध्यम से नेतृत्व क्षमता के विकास पर जोर दिया।

दूसरे सत्र में शिक्षा विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की प्रो. सारिका शर्मा ने कहा कि शैक्षिक व्यवस्था की सफलता पूर्ण रूप से नेतृत्व क्षमता एवं संस्था प्रमुखों के व्यवहार पर निर्भर करता है। संस्था में एक स्वस्थ एवं अनुकूल वातावरण निर्मित करने का उत्तरदायित्व संस्था में जिम्मेदार पदों पर आसीन नायकों का होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समावेशी संस्कृति के विकास पर जोर दिया गया है, जहां पर सब लोग मिलकर सामूहिक प्रयास से लक्ष्य की प्राप्ति में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकें। स्वागत एवं विषय स्थापना केंद्र निदेशक प्रो. सुरेंद्र राम ने की। संचालन प्रो. रमाकांत सिंह, तकनिकी सहयोग विनय सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रुचि जरीवाला ने किया।

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