पांच महीने की जंग में कुछ हासिल नहीं कर सका अमेरिका
तीन-चार दिन से दोनों तरफ से हमले रुके, नेतन्याहु से मुलाकात के दौरान ट्रंप बोले, ईरान से हो रही है अच्छे माहौल में बात, बैक डोर से बातचीत कराने में फिर शामिल हैं पाकिस्तान और कतर, राबर्ट मैली भी अब मानते हैं ईरान का परमाणु बम बनाना लॉजिकल
आसिफ हुसैनःकानपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से शांति समझौते पर एमओयू पर दस्तखत करने के बाद फिर पलटे और अचानक ईरान पर हमले कर दिए। इस पर ईरान ने भी इस्राइल समेत बहरीन, कुवैत, सऊदी अऱब, कतर, यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर तबाह कर दिए। इतना ही नहीं ईरान ने अमेरिका के लड़ाकू विमानों को भी फिजा में ही आग का गोला बना दिया। होर्मुज पर भी ईरान ने अपना कब्जा बरकार रखा। बाद में फिर हारकर ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान पर हमले रोकने का आदेश दे दिए। इसके बाद भी धमकी से वह बाज नहीं आ रहे हैं। इस तरह से अमेरिका की सैन्य ताकत की पोल ईरान ने खोलकर रख दी है। अरब देश भी अब कहने लगे हैं कि अमेरिका खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकता को उनकी रक्षा कैसे करेगा?
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने अचानक ईरान पर हमले कर दिए थे। उस समय सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर इमाम खामेनई के घर पर बम बरसा कर उनको शहीद कर दिया गया था। अमेरिका और इस्राइल को लगा था कि सुप्रीम लीडर को खत्म कर वह रिजीम चेंज कर देंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बाद में पाकिस्तान, कतर आदि देशों ने बीच में पड़कर समझौता कराया लेकिन अमेरिका फिर भी अपनी दादागीरी से बाज नहीं आया। सुप्रीम लीडर को इराक में दफन करने से पहले फिर ईरान पर हमले कर दिए लेकिन पिछले-तीन चार दिनों से ब्रेक लगा हुआ है। हो सकता है कि इस ब्रेक के पीछे भी कई देश बैक चैनल काम कर रहे हों। इस समय ईरान की जीत की बात इस तरह कह सकते हैं कि जो अमेरिका के थिंक टैंक ईरान को परमाणु बम बनाने से रोक रहे थे वह मौजूदा दौर में उसे लॉजिकल मान रहे हैं। राबर्ट मैली ने ईरान से न्यूक्लिर डील की थी। जो कि वह खुद यहूदी हैं। 2015 में इन्होंने ही डील की थी। अब वह खुद परमाणु बम ईरान के बनाने को लॉजिकल मानने लगे हैं। रेड माइक पर मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट सौरब शाही ने भी अपने प्रोग्राम में इस पर चर्चा की है।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू हो गई है। अब ट्रंप प्रशासन ने पांच महीनों से चल रही जंग से किसी तरह निकलने के रास्ते तलाश रहा है। फरवरी के बाद इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू फिर से वाशिंगटन पहुंचे हैं। दोनों की बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हम अच्छी बातचीत कर रहे हैं। आगे देखते हैं कि क्या होता है। उनका कहना है कि उम्मीद है कि अच्छा ही होगा। अमेरिका ने सोचा था कि हमला करेंगे और ईरान की सरकार तीन दिन में धराशायी हो जाएगा लेकिन पांच महीने की जंग में भी वह ईरान का जरा सा भी झुका नहीं सका है।
वाशिंगटन के मेयर जोहरान ममदानी ने गजा में हजारों बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों की हत्या का दोषी मानते हुए नेतन्याहु को गिरफ्तार कराने की बात कही थी। उनके खिलाफ इंटरनेशन कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी है। उनका विरोध करने के लिए काफी भीड़ जमा थी। इसीलिए वह व्हाइट हाउस के फ्रंट गेट पर कुछ ही देर रुक सके।
ईरान पर अमेरिका हमले में इस्राइल के अलावा कोई देश शामिल नहीं है। इसके बाद भी उसे शांति वार्ता से दूर ही रखा जा रहा है। अमेरिका के टुकड़ों पर पलने वाला इस्राइल अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता नहीं होने देना चाहता है। इसकी भी खीज आज ट्रंप ने नेतन्याहु के सामने निकाली है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिका ईरान पर हमले से कुछ हासिल नहीं कर सका। इससे अब वह किसी तरह बाहर निकलने के बहाने तलाश रहा है। अमेरिका की तरफ से कोई भी हमला होता है तो उसका सख्ती से जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है समझौते के लिए उनके दरवाजे न तो बंद हैं और न खुले हैं। पाकिस्तान और कतर समझौता कराने में लगे हैं। ईरान का साफ कहना है कि स्टेट आफ होर्मुज पर किसी तरह का समझौता नहीं होगा। इसके लिए ईरान और ओमान से समझौता भी हो रहा है। उधर, सउदी अऱब ने इराक की तरफ से आए ड्रोन पर नाराजगी जताई है। उसका कहना है कि ईरान के समर्थक ग्रुप ने अटैक किया था। जिसे मार मार गिराया गया। उसका कहना है कि इसका वह भी जवाब दे सकता है। सउदी अरब ने इसके लिए इराक के सफीर को तलब कर भी विरोध जताया।



