पैलेट गन पर मुद्दा गर्माया, अमित शाह निशाने पर, संसद ठप
छात्रों पर कार्रवाई न करने के समझौते के बाद भी हो रहा दमन, बिहार और बंगाल में हजारों छात्र-छात्राओं पर रिपोर्ट दर्ज, एके 47 चलाने वाला सिपाही सस्पेंड
कानपुर। नीट पेपर लीक के बाद कॉक्रोच जनता पार्टी का जंतर-मंचर पर प्रदर्शन सरकार के लिए फांस बन गया है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जिस तरह छात्र-छात्राओं के साथ बर्बरता की गई वह भुलाई नहीं जा सकती है। इसके अलावा बिहार, बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश में भी छात्रों का दमन किया जा रहा है। बिहार में तो पुलिस ने छात्र-छात्राओं पर चीन की एके 47 से गोलियां चलवा दीं। सोमवार को संसद में केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ बिल लेकर आई लेकिन विपक्ष छात्रों पर पैलट गन इस्तेमाल करने के मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह से सफाई

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मांगने पर अड़ गया। भारी हंगामे के बाद संसद को स्थगित करना पड़ा। संसद में जिस तरह से इस्तीफा देने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भाजपा सांसदों ने स्वागत किया, उसकी भी पूरे देश में फजीहत हो रही है।
नीट पेपर लीक के बाद निराशा में लगभग 30 बच्चों ने अपनी जानें गंवा दीं। इसके बाद सीजेपी ने धरना-प्रदर्शन शुरू किया। जंतर-मंतर पर धरने में वैज्ञानिक सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस धरने को मुख्य धारा की मडिया ने पूरी तरह नजरअंदाज किया। 16 जुलाई को पुलिस डॉक्टरों के भेष में आकर सोनम को उठा ले गए। इसके बाद से तो छात्रों और अभिभावकों में रोष और बढ़ गया। जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ गई। 20 को संसद मार्च के दौरान छात्र-छात्राओं को दुश्मन की तरह मारा-पीटा गया। उन पर पैलेट गनों का प्रयोग किया गया। बाद में केंद्र सरकार झुकी और प्रधान को अपनी ‘प्रधानी’ छोड़नी पड़ी। सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मिलकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द कराने, जान देने वाले बच्चों को एक-एक करोड़ मुआवजा देने के समझौते पर दस्तखत किए। इसके बाद धरना समाप्त हो गया लेकिन केंद्र सरकार अपनी दमनकारी नीतियों से बाज नहीं आ रही है। प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं के खिलाफ पूरे देश में रिपोर्ट दर्ज कराकर उनको जेल भेजा जा रहा है। बंगाल सरकार ने तो दस मुस्लिम बच्चों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बिहार में भी सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध बढ़ने पर एके 47 चलाने वाले पुलिस कर्मी को सस्पेंड कर दिया गया।
इस बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार पर छात्रों के दमन का आरोप लगाते हुए सोमवार को भी संसद नहीं चलने दी। सरकार के बार-बार बिल पर चर्चा का आग्रह करने के बाद भी विपक्ष नहीं माना। मंगलवार की रणनीति बनाने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक की गई। अब कल संसद में पेश किए गए बिल पर चर्चा होने की उम्मीद की जा रही है। इसी तरह राज्यसभा में भी कोई कार्य नहीं हो सका। विपक्ष के हंगामे की वजह से सभापति व उपसभापति को संसद कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हालांकि लोगसभा और राज्यसभा में स्पीकर और सभापति विपक्षी सांसदों को मनाने में लगे रहे। सरकार की ओर से मंत्रियों ने भी मनाने की कोशिश की और चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया लेकिन विपक्षी दल अपनी मांग पर अड़े रहे।
छात्र-छात्राओं की कानूनी मदद के लिए सिब्बल ने दिए एक करोड़
राज्यसभा सांसद व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के साथ प्रेस कांफ्रेंस में पूरे देश में छात्रों को कानूनी सहायता के लिए फंड बनाने की घोषणा की। इस फंड में उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार पूरे देश में प्रदर्शनकारी छात्रों को परेशान कर रही है। उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। दिल्ली के बाद सबसे खराब स्थिति बिहार की है। इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। उन्होंने कहा कि यह छात्र आंदोलन सभी का था। इसमें सभी धर्म और जाति के बच्चे और अभिभावक भी शामिल रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार इसे सांप्रदायिक रंग देने में लगी है। इसे कतई बरदाश्त नहीं किया जाएगा।
आशुतोश रांका ने बताया कि पुलिस बर्बरता की शिकायतों के लिए साक्षी नाम से एक वेबसाइट लांक की जा रही है। जिन लोगों के पास भी पुलिस की बर्बरता के वीडियो हैं वह अपलोड करें, पुलिस वालों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। पूरे देश में आंदोलनरत् छात्र-छात्राओं की मदद के लिए अधिवक्ताओं का पैनल बनाया जाए



