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नई दिल्ली : साइबर सुरक्षा से लेकर आतंकवाद तक, नए खतरों के खिलाफ एकजुट ब्रिक्स

नई दिल्ली। ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक यहां नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों/प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने सदस्य देशों के बीच मजबूत सामूहिक सहयोग का आह्वान किया और साथ ही दुनिया के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श भी किया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार सदस्य देशों ने गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, आतंकवादी नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और जलवायु-जनित अस्थिरता से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने कहा उन्होंने 21-22 मई 2026 को आयोजित आतंकवाद-रोधी ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूह और 8-9 जून को आयोजित सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग में सुरक्षा पर कार्य समूह की गतिविधियों और परिणामों की समीक्षा भी की। नेताओं ने ब्रिक्स सहयोग को और बढ़ाने का समर्थन किया, विशेष रूप से सदस्यों की क्षमता को मजबूत करने, सूचना साझा करने को बढ़ाने और आतंकवाद तथा साइबर जोखिमों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी।मंत्रालय ने कहा सदस्य देशों ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया, जिसका विषय है, ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’।

विदेश मंत्रालय ने प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बैठक के समापन के बाद, ब्रिक्स देशों के एनएसए व प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संयुक्त रूप से मुलाकात भी की। इसके अलावा भारतीय एनएसए डोभाल ने बैठक से इतर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा ब्रिक्स देशों के एनएसए और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मिलकर खुशी हुई। बदलते वैश्विक परिदृश्य में, आतंकवाद और साइबर सुरक्षा से लेकर नई तकनीकों तक, साझा चुनौतियों का सामना करने और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने में ब्रिक्स की अहम भूमिका है। भारत की अध्यक्षता व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने, ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं का समर्थन करने और एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने में योगदान देने का प्रयास करेगी। इस बैठक में एक बात का स्पष्ट संकेत मिला है कि वैश्विक सुरक्षा के मायने अब पारंपरिक युद्धों से आगे बढ़कर साइबर स्पेस, खाद्य संकट और तकनीक के दुरुपयोग तक फैल चुके हैं। भारत की अगुवाई में सदस्य देशों ने न सिर्फ इन उभरते खतरों पर एकजुटता दिखाई, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति को भी रेखांकित किया। आगामी सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले सुरक्षा रणनीतियों का यह साझा रोडमैप वैश्विक मंच पर ब्रिक्स ब्लॉक की बढ़ती प्रासंगिकता और मजबूत सामूहिक इच्छाशक्ति को साबित करता है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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