
संवाददाता / गौतमबुद्धनगर। सोचिए जरा 40 साल की उम्र हो, शादी हुए 18 साल बीत चुका हो, तीन बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी हो, क्या ऐसी परिस्थितियों में कोई महिला अफसर बनने का ख्वाब देख सकती है, लेकिन दीपा भाटी ने यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर एक शानदार मिसाल पेश की है। साल 2021 में दीपा ने यूपी पीसीएस की कठिन परीक्षा पास की और 166वीं रैंक हासिल कर अफसर बनीं। गौतमबुद्धनगर जिले के एक छोटे से गांव कोंडली बांगर की दीपा भाटी रहने वाली हैं।बहुत ही साधारण से परिवार में जन्मीं दीपा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से पूरी की।बचपन से ही किताबों से दीपा का बेहद गहरा नाता।जिंदगी में कुछ बहुत बड़ा करने की हसरत दीपा के दिल में हमेशा पलती रहती थी।दीपा ने केमिस्ट्री में अपना ग्रेजुएशन किया और फिर इतिहास जैसे विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।सब कुछ ठीक चल रहा था,लेकिन छोटे शहरों और गांवों की आम कहानी की तरह ही दीपा की भी बहुत कम उम्र में शादी कर दी गई।शादी के बाद दीपा की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।ससुराल की जिम्मेदारी संभालना,बड़े बुजुर्गों की देखभाल करना।एक के बाद एक तीन बच्चों की मां बनने के बाद तो जैसे दीपा के अपने सारे सपने बहुत पीछे छूट गए।रोजमर्रा की भागदौड़ बस चूल्हे चौके और बच्चों तक ही सिमट कर रह गई थी।परिवार की थोड़ी बहुत आर्थिक मदद करने और खुद को किसी काम से जोड़े रखने के लिए दीपा भाटी ने बीच में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया था।दीपा को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता था, लेकिन शायद किस्मत को उनका यह सफर भी मंजूर नहीं था।अचानक दीपा गले में कुछ गंभीर दिक्कतें शुरू हो गईं।हालत यह हो गई कि डॉक्टरों ने उन्हें साफ हिदायत दे दी कि वो अब क्लास में ज्यादा नहीं बोल सकतीं।दीपा के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका था। मजबूरी में आकर दीपा को अपनी वो नौकरी छोड़नी पड़ी। एक पल को लगा कि अब जिंदगी में आगे क्या होगा,ऐसे मुश्किल और मायूसी भरे समय में दीपा के भाई ने एक ऐसी सलाह दी,जिसने दीपा की जिंदगी का पूरा रुख ही मोड़ दिया। भाई ने कहा कि क्यों न वो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू करें।शुरुआत में तो यह बात थोड़ी अजीब और नामुमकिन सी लगी,लेकिन फिर दीपा ने ठान लिया कि अब यही उनका नया रास्ता है। परीक्षा की तैयारी का यह सफर आसान नहीं था।दीपा भाटी कोई आम स्टूडेंट नहीं थीं जो किसी हॉस्टल या पीजी में रहकर 24 घंटे सिर्फ पढ़ाई कर रही हों।दीपा एक पत्नी थीं,तीन बच्चों की मां थीं और पूरे घर की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ उनके कंधों पर थी।दीपा का दिन सुबह बहुत जल्दी शुरू हो जाता था।पहले घर के सारे काम निपटाना,सबके लिए नाश्ता खाना बनाना,बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजना।इन सब से फुरसत मिलने के बाद जब थोड़ा बहुत वक्त बचता, तो दीपा अपनी किताबें लेकर बैठ जातीं।दोपहर में जब घर में थोड़ी शांति होती,तो वो अपनी पढ़ाई करतीं। फिर रात को जब सब सो जाते,तब जाकर दीपा का असली संघर्ष शुरू होता था। नींद से लड़ते हुए वो अक्सर देर रात तक जागकर पढ़ती रहीं।बड़ी कामयाबी कोई रातों रात मिलने वाली चीज नहीं है। दीपा भाटी ने पहली बार यूपी पीसीएस का एग्जाम दिया,लेकिन पास नहीं हो पाईं।दीपा ने फिर से कोशिश की,दूसरी बार भी सफलता नहीं मिली,लेकिन मानों दीपा फौलाद की बनी थीं। दीपा ने अपनी कमियों को पहचाना,अपनी रणनीति में बदलाव किया और दोगुनी मेहनत के साथ फिर से मैदान में उतर गईं। आखिरकार दीपा ये कड़ी तपस्या रंग लाई। साल 2021 में दीपा न सिर्फ अपना एग्जाम क्लियर किया, बल्कि 166वीं रैंक लाकर खुद को साबित कर दिया।




