आज पूरा विश्व आयुर्वेद की तरफ देख रहा: प्रो.एल के द्विवेदी

सुशील कुमार मिश्र/ वाराणसी
BHU के रसशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित ऱाष्ट्रीय संगोष्ठी ब्रिजिंग क्लासिकल एंड कंटेम्पररी आस्पेक्ट ऑफ़ आयुर्वेदिक फार्मास्युटिक्स के अवसर पर ऱाष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर से आए गेस्ट आफ आनर प्रो. एल. के. द्विवेदी ने कहा की आज पूरा विश्व आयुर्वेद की तरफ़ देख रहा है।पूर्व संकाय प्रमुख आयुर्वेद संकाय प्रो सी बी झा ने बताया कि रसाशास्त्र विधा की महत्वपूर्ण आज देखने को मिल रहा है की बहुत कम आयुर्वेद के विश्वविद्यालय में भी रस शास्त्र विभाग से दो प्रो के. आर. सी. रेड्डी एवं पी के प्रजापति लोग कुलपति के रूप में सुशोभित कर रहे है।पूर्व संकाय प्रमुख आयुर्वेद संकाय प्रो के एन द्विवेदी ने बताया कि यह symposium छात्रों एवं जनता के लिए अत्यन्त लाभकारी होगा। क्योंकि जब companys औषधियों को सही बनायगी तो वह जनता के लिए अत्यन्त लाभकारी होगी । समाज में पारा को लेकर भ्रम फैलाया जाता रहा है जबकि वह manufacturing अच्छी होने पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो के के त्रिपाठी ने बताया कि महामना जी द्वारा integration युक्त चिकित्सा व्यवस्था का शुरूआत किया गया था जिसमे आधुनिक चिकित्सा एवं आयुर्वेद चिकित्सा को सम्मिलित कर शोध को बढ़ावा विश्वविद्यालय में मिलता रहा है ।

आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति गेस्ट आफ आनर प्रो.के.आर.सी.रेड्डी द्वारा छात्रों को आयुर्वेद के क्षेत्र में विश्व स्तरीय शोध युक्त कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया, इसके साथ ही रस शास्त्र विभाग के इस प्रकार के जनहित कार्य की सराहना किए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. गोपाल नाथ डीन रिचर्स चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने बताया कि सैकडों बैक्टीरिया एवं वायरस शरीर में रहते है, उसकी सफाई करने के लिए ही पंचकर्म चिकित्सा की व्यवस्था आयुर्वेद में किया गया है जिससे negative gut microbiota की सफ़ाइ हो जाती है, इससे रोगों से बचाव में लाभ मिलता होगा। तीनों संकाय को मिलकर शोध के क्षेत्र में उत्तकृष्ट कार्य करने की वर्तमान में आवश्यकता है । वर्तमान में शोध evidence based प्रकाशन होने की आवश्यकता है, यूरोपियन एसोशिएशन बन सकता है तो हमारे चिकित्सा विज्ञान संस्थान के तीनों संकाय एवं नर्सिंग कालेज को मिलकर शोध के क्षेत्र में कार्य करने के लिए एसोशिएशन बनाने की आवश्यकता है
आयोजन सचिव प्रो नम्रता जोशी ने बताया कि इस कार्यक्रम से जनता के बीच जो भ्रम फैलाया जाता रहा है रस शास्त्रीय आयुर्वेद औषधियों के बारे में उसको दूर करने के लिए रस शास्त्र के विशिष्ठ विद्वानों को आमंत्रित किया गया था जिसमें विद्वानों ने स्पष्ट किया कि यदि औषधियों का निर्माण अच्छी तरह से होता है तो इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं है, इससे छात्र एवं जानता में सकारात्मक सोच पैदा होगी।पेनल डिस्कशन छत्रों के बीच किया गया जिसमें प्रोफेसर ऐल बी सिंह, प्रोफेसर. सी बी झा , प्रोफेसर एल एल द्विवेदी,प्रो पी एस ब्यादगी , डॉ शशि रेखा, वैद्य डॉ सुशील कुमार दूबे द्वारा छात्रो के सारे प्रश्नों के समुचित निराकरण किया गया। मंच का संचालन डॉ रम्या एवं डॉ आदित्य सरोज द्वारा किया गया । धन्यवाद ज्ञापन डॉ पी एस पांडेय द्वारा किया गया। प्रो सी बी झा , प्रो के एन द्विवेदी , डॉ लक्ष्मीकान्त , प्रो एल बी सिंह के व्याख्यान हुए
इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रो. संगीता गहलोत, प्रो सी एस पाण्डे, प्रो जे एस त्रिपाठी, प्रो पी ब्यादगी , प्रो सुनीता प्रो पालीवाल , डॉ शशिरेखा , डॉ शिखा , डॉ सतत , डॉ मृदुल , डॉ देवानंद, डॉ गुरुप्रसाद , डॉ रोहित शर्मा एवं मंच संचालन डॉ रम्या एवं डॉ आदित्य ने किया।




