
नेपीडॉ। विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने म्यांमार के नए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। वह म्यांमार सरकार के निमंत्रण पर 8-11 अप्रैल तक म्यांमार के दौरे पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने म्यांमार के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और साथ ही भारत-म्यांमार सहयोग के तहत एक स्कूल निर्माण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और विकास परियोजनाओं को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने यांगून में प्रवासी भारतीय और ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ के साथ मुलाकात की, जहां उन्होंने म्यांमार के साथ सांस्कृतिक संबंधों और आईसीसीआर के कार्यों पर चर्चा की।कीर्तिवर्धन सिंह ने अपने इस दौरे से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा म्यांमार के उप वाणिज्य मंत्री, यू मिन मिन के साथ शामिल होकर मुझे खुशी हुई, जहां हमने उड़द और अरहर के व्यापार पर द्विपक्षीय एमओयू के विस्तार के लिए ‘पत्रों का आदान-प्रदान’ होते देखा। उन्होंने कृषि के साथ-साथ खाद्य क्षेत्र में व्यापार और निवेश सहयोग को दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
विदेश राज्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, मैंने म्यांमार के रणनीतिक समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की, जिनमें ‘म्यांमार इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘सेंटर फॉर पीस एंड रिकंसिलिएशन’, ‘रखाइन लिटरेचर एंड कल्चरल एसोसिएशन’ और ‘म्यांमार-इंडिया फ्रेंडशिप एसोसिएशन’ शामिल थे। इसके अलावा यांगून विश्वविद्यालय और विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से भी संवाद हुआ। भारत-म्यांमार सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विभिन्न क्षेत्रों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। राज्यमंत्री ने अपनी यात्रा की शुरुआत भारतीय नौसेना के एक सर्वेक्षण पोत (सर्वे शिप) पर आयोजित एक कार्यक्रम के साथ की थी। इसकी जानकारी देते हुए मंत्री ने एक पोस्ट में कहा आज यांगून में भारतीय नौसेना के सर्वेक्षण पोत ‘आईएनएस संध्याक’ पर आयोजित ‘डेक रिसेप्शन’ में शामिल होकर गर्व का अनुभव हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बातचीत ने भारत और म्यांमार के बीच गहरे और सुस्थापित जुड़ाव को दर्शाया। आईएनएस संध्याक की यह यात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘महासागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप है। विदेश राज्यमंत्री की यह दौरा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और म्यांमार के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। साथ ही उनकी यह चार दिवसीय उच्च-स्तरीय आधिकारिक यात्रा 2021 के तख्तापलट के बाद म्यांमार में सैन्य नेतृत्व को भारत की स्वीकृति के संकेत के रूप में भी देखी जा रही है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


