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गाजीपुरधर्म

गाजीपुर : महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में पूजित हो रही हैं मां  

डा. ए. के.राय/ गाजीपुर। पूर्वांचल के प्रसिद्ध सिद्धपीठ हथियाराम की शाखा हरिहरपुर स्थित पवित्र मां कालीधाम मठ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन मंदिर और उसमें विराजमान मां काली की तीनों प्रतिमाएं अपने आप में विशेष धार्मिक महत्व रखती हैं। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से की गयी मां की पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती और उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। मान्यता है कि यहां स्थापित तीनों देवी प्रतिमाओं के दर्शन और विधि-विधान से पूजन करने पर भक्तों के समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं, यहां तक कि काल के प्रभाव को भी टाला जा सकता है। मंदिर में स्थापित मां काली की प्रतिमाओं की महत्ता का वर्णन करते हुए सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी श्री भवानीनन्दन यति जी महाराज ने बताया कि यहां स्थापित दक्षिणमुखी प्रतिमाएं अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर की सबसे प्राचीन प्रतिमा शव के ऊपर स्थापित है, जो विशेष तांत्रिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है। उन्होंने अपने गुरुजी से सुनी एक प्राचीन कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित इस प्रतिमा की एक अंगुली खंडित हो गई थी। जब इस बात की जानकारी उनके गुरुजी महाराज को हुई तो उन्होंने खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित कराने का निर्णय लिया। इसके लिए प्रतिमा को विस्थापित करने का कार्य शुरू किया गया, लेकिन जैसे ही मजदूरों ने प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया, मंदिर की छत से रक्त की बूंदें टपकने लगीं। इस अलौकिक घटना को देखकर मजदूर भयभीत होकर काम बन्द कर तत्काल इसकी सूचना गुरुजी महाराज को दी।

 स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने बताया कि यह घटना सुनते ही गुरुजी महाराज तुरंत मंदिर पहुंचे और स्थिति को समझते हुए उन्होंने खंडित प्रतिमा को यथास्थान पर बने रहने दिया। पहले से मंगाई गई नई प्रतिमा को उसी के समीप स्थापित कराया गया। इसके बाद धार्मिक परंपरा और संतुलन बनाए रखने के लिए तीसरी प्रतिमा की स्थापना भी आवश्यक हो गई, जिसके परिणामस्वरूप एक श्वेत प्रतिमा की स्थापना की गई। इस प्रकार मंदिर में स्थापित तीनों प्रतिमाएं मां के तीन स्वरूप—महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में पूजित हैं। इन प्रतिमाओं का प्रत्यक्ष स्पर्श वर्जित है, क्योंकि ऐसा करने से उनकी आध्यात्मिक शक्ति क्षीण होने की मान्यता है। हालांकि श्रद्धा और विधिपूर्वक अर्चन – वंदन करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।  इस समय हरिहरपुर स्थित कालीधाम में वासंतिक नवरात्रि के अवसर पर प्रतिपदा से लेकर नवमी तक विशेष धार्मिक यज्ञ अनुष्ठानों का आयोजन चल रहा है जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक आभा और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। इस दौरान यज्ञ मंडप की परिक्रमा, पूजा-अर्चना और संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जनपद सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। वासंतिक नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा फलाहार और महाप्रसाद वितरित किया जा रहा है। श्रद्धालु मां काली और महामंडलेश्वर के जयकारे लगाते हुए प्रसाद ग्रहण कर अपने को धन्य कर रहे हैं।

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