
असगर अली /ब्यूरो चीफ,देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह के आत्महत्या मामले में बेसिक शिक्षा कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने से कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार चल रहे हैं और उन पर 10 हजार रुपए इनाम भी घोषित हो चुका है। बताते चले कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह जनपद के गौरीबाजार विकास खण्ड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे।वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के साथ रहते थे। विगत 20 फरवरी की रात उन्होने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइट नोट लिखा था और साथ ही वीडियो के माध्यम से बयान भी जारी किया था। इस मामले में शिक्षक की पत्नी की तहरीर पर बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। मामले की जांच में दोषी मिलीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को 27 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था, जबकि लिपिक संजीव सिंह पहले ही निलंबित कर दिए गए
थे। इसके अलावा मामले में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन के पूर्व प्रधानाचार्य अनिरूद्ध सिंह को जेल भेजा जा चुका है। इस मामले की जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक बेसिक कर रहे हैं। जांच प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब नए- नए खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है लिपिक संजीव सिंह जिस पटल पर कार्यरत था, उस पटल की जिम्मेदारी इसके पहले वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव देखते थे।जिसमें उनके स्तर पर भी लापरवाही बरती गई। इस मामले में दोषी मानते हुए अब शासन ने तनुज श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को हुइ इस कार्यवाई से कार्यालय में खलबली मची हुई है। इस संदर्भ में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि शासन से जिला बेसिक अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक को निलंबित किया गया है। जिस पटल पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह का प्रकरण था उसकी जिम्मेदारी संजीव सिंह से पहले तनुज श्रीवास्तव के पास ही थी। जांच में उन्हें भी लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। जिसके आधार पर कार्रवाई हुई है।



