कहीं स्कीन को नुकसान न पहुंचा दें होली के रंग?

नीमा प्रवक्ता डॉ ओपी सिंह ने कहा कि होली हमेशा प्राकृतिक व सुरक्षित रंगों से खेले
चन्दौली । नीमा प्रदेश प्रवक्ता डॉ ओ पी सिंह के अनुसार होली हमेशा प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों से खेलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई केमिकल युक्त रंगों में हानिकारक तत्व, यहां तक कि महीन कांच के कण भी मिले हो सकते हैं, जो त्वचा पर रैशेज, खुजली, जलन और गंभीर एलर्जी का कारण बनते हैं। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें पहले से किसी प्रकार की एलर्जी या चर्म रोग है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और संभव हो तो ऐसे रंगों से दूर रहना चाहिए।
होली के रंगों के संपर्क में आने से त्वचा में जलन और खुजली होना आम बात है। कुछ मामलों में, जलन, सूखापन, पपड़ी बनना, रिसाव और बालों का झड़ना जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।
हमेशा साफ पानी से होली खेलनी चाहिए। गंदा या दूषित पानी कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। खासकर डायरिया, स्किन इन्फेक्शन और आंखों की परेशानी आपके लिए अनचाही मुसीबत पैदा कर सकती है। दरअसल, होली के दौरान टंकी, पाइप या खुले स्रोत का पानी कई बार साफ नहीं होता। अगर यह पानी मुंह में चला जाए तो बैक्टीरिया और वायरस शरीर में पहुंच सकते हैं। इससे डायरिया, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में यह खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहें। गंदे पानी के संपर्क में आना त्वचा के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। खुजली, लाल चकत्ते या रैशेज हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से स्किन एलर्जी है, उन्हें और भी अधिक सावधानी रखनी चाहिए।डॉ सिंह ने कहा कि होली खेलने से पहले पूरे शरीर पर नारियल तेल या अच्छा माइश्चराइजर जरूर लगाएं, ताकि रंग त्वचा के रोमछिद्रों में गहराई तक न जा सके। सूती और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना बेहतर है। बालों की सुरक्षा के लिए सिर को टोपी या कपड़े से ढकें और आंखों को बचाने के लिए चश्मे का उपयोग करें।




