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उत्तर प्रदेशब्रेकिंग न्यूज़मऊ

मऊ:मधुबन तहसीलदार के भ्रष्टाचार की खिलाफ आवाज उठाने गए,SDM ने पुलिस बुलाकर चैंबर से वकीलों किया बाहर

— तहसील बना दलाली का अड्डा, प्राइवेट आदमी रखकर कर रहे वसूली
— एसडीएम ने वकीलों से कहा ज्यादा राष्ट्र भक्त बनने की जरूरत नहीं
— तहसील बार एसोसिएशन मधुबन द्वारा मांगे गए समर्थन में घोसी और मऊ के अधिवक्ता

घोसी (मऊ)। तहसील और तहसीलदार शैलेंद्र चंद्र सिंह के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने गए वकीलों के साथ अभद्रता और तानाशाही रवैया अपनाते हुए एसडीएम अभिषेक गोस्वामी ने पुलिस बुलाकर उन्हें अपने चैंबर से बाहर निकाल दिया। जानकारी के अनुसार तहसील बार एसोसिएशन घोसी और मऊ के अधिवक्ता, तहसील में चल रही दलाली और अवैध वसूली के विरोध में एसडीएम से वार्ता करने पहुंचे थे।
वकीलों ने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय में प्राइवेट व्यक्तियों को रखकर दस्तावेज़ों के नाम पर आम जनता से अवैध वसूली की जा रही है, जिससे पूरा प्रशासनिक तंत्र दलालों के इशारे पर चल रहा है। जब अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे पर एसडीएम से सवाल किए, तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए वकीलों से कहा, “ज्यादा राष्ट्र भक्त बनने की जरूरत नहीं” और उन्हें पुलिस बुलाकर चैंबर से बाहर निकाल दिया। घटना के विरोध में तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मिश्र के नेतृत्व में घोसी तहसील और मऊ के वकील एसडीएम चैंबर के बाहर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि तहसील में चल रहे भ्रष्टाचार पर रोक, और जल्द ही तहसीलदार और एसडीएम का तबादला नहीं हुआ तो वे आंदोलन तेज करेंगे। इस दौरान बार एसोसिएशन के महामंत्री राजेश सोनकर, जयहिंद सिंह, राजेंद्र यादव, जनार्दन यादव, पीसी राय, नदीम अख्तर, संतोष, राम बदन, सतीश पाण्डेय, पूर्व महामंत्री ब्रजेश पाण्डेय, उमाशंकर उपाध्याय, विपुल राय, भुवेश श्रीवास्तव, रमेश श्रीवास्तव, रत्नेश श्रीवास्तव, पूर्व शासकीय अधिवक्ता दिनेश राय, वरिष्ठ अधिवक्ता कालिकादत्त पाण्डेय, रफ़ियुल्लाह खान समेत बड़ी तादाद में अधिवक्ता मौजूद रहे।
मधुबन बार एसोसिएशन के समर्थन में घोसी के अधिवक्ताओं ने दिया था प्रस्ताव
मधुबन तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिवक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार के विरोध में अब घोसी के अधिवक्ता भी मैदान में उतर आए हैं। सोमवार को घोसी तहसील बार एसोसिएशन और मऊ कलेक्ट्रेट की ज्वाइंट बैठक में सर्वसम्मति से मधुबन बार एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे आंदोलन का समर्थन किया गया अधिवक्ताओं ने कहा कि तहसील प्रशासन द्वारा प्राइवेट व्यक्तियों के माध्यम से की जा रही अवैध वसूली और अधिवक्ताओं को चैंबर से बाहर निकालने जैसी घटनाएं लोकतंत्र और कानून के शासन के खिलाफ हैं।

रिपोर्ट- सतीश कुमार पांडेय

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