आजमगढ़: शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी पास करने के सुप्रीम आदेश को लेकर ऊहापोह

गोविन्द लाल शर्मा
आजमगढ़। मंगलवार को परिषदीय विद्यालय में सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश को लेकर ऊहापोह की स्थिति रही। अब लोग प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों को अब सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी पास करना जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक जिनकी नौकरी 5 वर्ष से अधिक बची है उन्हें 2 वर्ष के भीतर टीईटी पास करनी होगी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई शिक्षक तय सीमा समय सीमा में टीईटी पास करने में विफल रहता है तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या जबरन सेवा निवृत्त किया जा सकता है। कोर्ट ने उनको राहत दी है जिनकी सेवा 5 वर्ष से कम बची है।जस्टिस दीपंकर दत्ता मनमोहन की पीठ ने फैसले में स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की नौकरी 5 वर्ष से कम बची है उन्हें टीईटी पास करने की जरूरत नहीं है। लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। 29 जुलाई 2011 को आरटीई लागू हुआ था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से शिक्षक वर्ग में हलचल मची हुई है सोशल मीडिया पर तमाम पोस्ट किया जा रहे हैं अपनी नौकरी को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है हालांकि अभी मामले में शासन का क्या आदेश आता है इसके ऊपर सभी की निगाहें टिकी हैं।




