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उत्तर प्रदेशएजुकेशनवाराणसी

एक कार्ड,एक विश्वविद्यालय, योजना को साकार करने की ओर BHU की बड़ी पहल

केन्द्रीय ग्रंथालय में पायलट परियोजना के रूप में लागू, विद्यार्थियों को वितरित किये जा रहे हैं RFID कार्ड

सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी।विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य सदस्यों को बेहतर व सुविधाजनक परिसर अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत विश्वविद्यालय ने रेडियो फ्रिक्वेंसी से लैस आई डी कार्ड जारी करने आरंभ कर दिये हैं। शुरुआत में विश्वविद्यालय स्थित सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रंथालय में पायलट परियोजना के रूप में यह पहल की गई है। इन कार्ड के इस्तेमाल से पुस्तक निर्गमन एवं वापसी की प्रक्रिया और अधिक सरल, त्वरित और पारदर्शी हो सकेगी। इस तकनीक की मदद से विद्यार्थी आसानी से यह जान सकेंगे। कौन सी पुस्तक उपलब्ध है और वह पुस्तकालय के किस खंड में रखी गई है। स्मार्ट आरएफआईडी कार्ड की सहायता से पुस्तकालय में प्रवेश और उपस्थिति की प्रक्रिया भी डिजिटल हो गई है। अब विद्यार्थियों और कर्मचारियों को लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। कार्ड को केवल टर्मिनल पर टैप करने से उपस्थिति स्वतः दर्ज हो जाएगी, जिससे मैनुअल एंट्री और रजिस्टर पद्धति समाप्त हो जाएगी। ये कार्ड लागू होने से सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रंथालय अब अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित स्मार्ट लाइब्रेरी के रूप में नई पहचान प्राप्त कर रहा है।

केन्द्रीय ग्रंथालयी डॉ. डी. के. सिंह ने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय संभवतः देश का पहला ऐसा संस्थान है, जहाँ इतनी विशाल पुस्तक संपदा वाले पुस्तकालय में इस तकनीक को लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रंथालय में वर्तमान में 16 लाख से अधिक पुस्तकें, लाखों बाउंड पीरियॉडिकल्स, 13,795 जर्नल्स और 12,556 दुर्लभ पांडुलिपियाँ संग्रहित हैं। इसके लगभग 36,000 उपयोगकर्ता हैं, जिनमें विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में इस स्मार्ट आरएफआईडी कार्ड तकनीक का विस्तार विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों, संकायों, महाविद्यालय और विभागीय पुस्तकालयों तक किया जाएगा। छात्र अधिष्ठाता प्रो. अनुपम कुमार नेमा ने बताया कि आरएफआईडी कार्ड विश्वविद्यालय द्वारा लागू एक नई व प्रभावी सुविधा है। विश्वविद्यालय में इन कार्ड का वितरण आरंभ हो चुका है। एक कार्ड, एक विश्वविद्यालय’ योजना को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे विश्वविद्यालय की अनेक सुविधाओं से जोड़ने का प्रस्ताव है, जैसे तरणताल, खेल सुविधाएं आदि। इस कार्ड के पूरी तरह से प्रयोग में आने पर न सिर्फ अनेक पहचान पत्रों की ज़रूरत ख़त्म हो जाएगी बल्कि यह वर्तमान में जारी प्लास्टिक कार्ड का भी बेहतर विकल्प साबित होगा। यह कार्य विश्वविद्यालय के सदस्यों के लिए एक यूनिवर्सल आईडी कार्ड का काम करेगा।

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