
निलंबन व बहाली के नाम पर शिक्षकों का हो रहा शोषण,शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह
हिन्दुस्तान संदेश/राकेश चंदेल
सोनभद्र। सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व शोषण रोकने के लिए आनलाइन व्यवस्था को स्थापित करने की मंशा पर आला अधिकारी ही लीपापोती करने में लगे हैं। सरकार द्वारा जनहित व बच्चों से जुड़ी योजनाओं के साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन शिक्षकों द्वारा आनलाइन व ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। वहीं शिक्षकों को अवकाश व उनके सर्विस से संबंधित सारे कार्य आनलाइन ही किए जाने हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अधिकारियों द्वारा शिक्षकों का शोषण न हो। लेकिन बावजूद इसके शिक्षकों का शोषण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अभी कुछ दिनों पूर्व ही जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जनपद के नगवां शिक्षा क्षेत्र में 27 अक्टूबर को औचक निरीक्षण किया गया जिसमें कथित गैरहाजिरी पर चार शिक्षकों को निलंबित व सात शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध कर दिया गया। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई थी उनके द्वारा मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से अवकाश लिया गया था और एक शिक्षिका बाल्यकाल अवकाश पर थी। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जब शिक्षक वैधानिक रूप से अवकाश पर हैं तो उसके विरुद्ध कार्रवाई क्यों की गई।
नगवां ब्लाक के छः विद्यालयों के बंद रहने की शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा जांच के आदेश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चार शिक्षकों को निलंबित व सात का वेतन अवरुद्ध करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि पकड़ा दी गई जबकि शिक्षक अवकाश पर थे। प्राथमिक विद्यालय सियरीया के सहायक अध्यापक दिनेश कुमार वर्मा को निलंबित कर दिया गया जबकि उनका अवकाश मानव संपदा पोर्टल पर विभाग द्वारा स्वीकृत था। इस तरह की कार्रवाई से एक ओर जहां शिक्षकों में नाराजगी है, तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर कई प्रश्न खड़े करता है। शिक्षकों के निलंबन व बहाली के नाम पर अधिकारियों द्वारा किया जाने वाला शोषण न सिर्फ शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताणित करने वाला है बल्कि अपरोक्ष रूप से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से भी वंचित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ शिक्षकों का कहना है कि एक ओर प्रतिदिन विद्यालय जाने वाले अध्यापकों पर तो कार्रवाई होती है। लेकिन वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा अधिकारी के करीबी शिक्षक विद्यालय ही नहीं जाते। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा नियमों की अनदेखी कर कार्रवाई करना सरकार के मंसूबे पर पानी फेरने जैसा ही है। ऐसे में जनपद के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों को कितनी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल पाएगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिना जांच किए कार्रवाई करना वैधानिक नहीं
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेश पांडेय ने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा इस तरह की कार्रवाई वैधानिक नहीं है। संघ इस निलंबन व वेतन अवरुद्ध करने की कार्रवाई वापस लेने की मांग करता है। अटेवा के राज मौर्य ने कहा कि बगैर स्पष्टीकरण करण लिए शिक्षकों पर कार्रवाई करना उनका शोषण है। संगठन इसकी निंदा करता है। इस संदर्भ में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पांडेय का सीयूजी नंबर 9453004197 पर जानकारी हासिल नहीं हो पायी जिससे उनका पक्ष नहीं रखा जा सका।




