मऊ:आरएसएस स्थापना दिवस पर भव्य पथ संचलन,देशभक्ति गीतों से गूंजा बाजार

ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा से किया स्वागत,सैकड़ों स्वयंसेवकों ने लिया भाग
सतीश कुमार पांडेय
दोहरीघाट (मऊ)।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100वें स्थापना वर्ष के अवसर पर रविवार को दोहरीघाट ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्रामसभा गोठा में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गोठा स्थित ऐतिहासिक रामशाला मंदिर से प्रारंभ हुआ, जिसमें सैकड़ों स्वयंसेवक पारंपरिक गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में नगर भ्रमण करते नजर आए।
पथ संचलन रामशाला मंदिर से शुरू होकर पश्चिम मुहाल, पीली कोठी, गोठा बाजार, रामलीला भवन, काली चौक से होते हुए पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। संचलन के मार्ग पर स्थान-स्थान पर ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया।
नगर का माहौल देशभक्ति गीतों और घोषवाक्यों से ओजस्वी बन गया। संचलन के दौरान वातावरण में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। इस ऐतिहासिक आयोजन ने क्षेत्रवासियों में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।रामशाला मंदिर परिसर में आयोजित स्वागत कार्यक्रम मेंजनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में रही विशेष सहभागिता
इस अवसर पर बलिया विभाग से विद्यांत जी, विनोद जी, मऊ से आनंद जी, अनिल जी, दूधनाथ जी, नर्वदेश्वर जी, खंड से विपुल जी, मयंक जी, मनीष जी, पवन जी, उमाशंकर जी, शशिकांत जी, गोपाल राय सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
विंदूकांत जी का पाथेय
कार्यक्रम के दौरान विंदुकांत जी ने पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि – “संघ का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को जागृत करना है। अनुशासन, सेवा और समर्पण के माध्यम से हम समाज को मजबूत और संस्कारित बना सकते हैं।”
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
कार्यक्रम को लेकर दोहरीघाट थाना प्रभारी राजकुमार सिंह ने बताया कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई और रूट पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। स्थानीय नागरिकों ने भी सहयोग कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।यह आयोजन न केवल संघ की शताब्दी वर्ष की गरिमा को बढ़ाने वाला रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रप्रेम की भावना को भी सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ।




