
कानपुर। पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाए जाने के बाद से वाहन चालकों के मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं हैं। चर्चा है कि नए ईंधन (E 20) से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है। इंजन खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इन सभी आशंकाओं और भ्रांतियों को आईआईटी कानपुर की इंजन रिसर्च लैब के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉक्टर ध्रुवराज कराना ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही शोध में यह बात साफ हुई कि E 20 ईंधन से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है । वैज्ञानिक डॉ. ध्रुवराज ने कहा उनके लैब टेस्ट में E20 फ्यूल से माइलेज में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की गई है। लोगों के बीच माइलेज को लेकर जो अलग-अलग अनुभव या शिकायतें आ रही हैं। उसका मुख्य कारण हर व्यक्ति के गाड़ी चलाने का तरीका और सड़क की स्थिति है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मिलने वाले ईंधन का ऑक्टेन नंबर भी थोड़ा भिन्न होता है। जो माइलेज पर असर डालता है।वैज्ञानिकों ने सिर्फ इंजन पर ही नहीं, बल्कि पूरी बाइक को चेसिस पर रखकर इसका गहन परीक्षण किया है और E20 ईंधन में माइलेज कम होने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई है। BS4 और BS6 दोनों ही मानकों वाले वाहनों में E20 ईंधन से फ्यूल पंप या इंजन खराब होने का कोई खतरा नहीं है। हाल के दिनों में सामने आईं इस तरह की कुछ शिकायतें ईंधन के रख-रखाव या पेट्रोल पंपों पर उसके गलत तरीके से स्टोरेज से जुड़ी हो सकती हैं। जिसकी फिलहाल जांच चल रही है। सरकार ने काफी सोच-समझकर ही E20 ईंधन का मानक तय किया है। इसलिए वाहन चालकों को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। डॉ. ध्रुवराज ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने E85 यानी 85 फीसदी इथेनॉल मिश्रण से गाड़ियां चलाने की तकनीक पहले से विकसित कर ली है। यह आधुनिक तकनीक कार निर्माता कंपनियों को भी सौंपी जा चुकी है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है। 85 प्रतिशत तक इथेनॉल का इस्तेमाल करने के बावजूद गाड़ियों की पिकअप और इंजन की क्षमता में कोई कमी नहीं आती है।बाजार में फैली अफवाहों के भ्रम में नहीं आना चाहिए।




