
असगर अली/ ब्यूरो चीफ ,भाटपार रानी देवरिया । भाटपार रानी तहसील क्षेत्र में स्थित रमेश भारत गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति का संकट इस कदर गहरा गया है कि लोगों को खाना बनाने के लाले पड़ गए हैं। सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों के बीच, भाटपार रानी की भारत गैस एजेंसी उपभोक्ताओं को ‘सर्वर’ और ‘टोकन’ के मकड़जाल में उलझाकर दर-दर भटकने को मजबूर कर रही है। हैरानी की बात यह है कि दोपहर के करीब 12:30 बजे ही एजेंसी का मुख्य गेट बंद कर दिया जाता है। जिससे दूर-दराज से आए उपभोक्ता चिलचिलाती धूप में घंटों परेशान रहते है। गैस की किल्लत अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि पारिवारिक कलह का कारण बन गई है। अहिरौली तिवारी निवासी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी पत्नी ने साफ चेतावनी दी है- “जब तक गैस सिलेंडर नहीं लाओगे, तब तक घर पर खाना नहीं मिलेगा।” वहीं बहोरवा निवासी और कई उपभोक्ता ने बताया कि चार-चार दिन पहले बुकिंग और डीएसी (DAC) कोड मिलने के बाद भी उन्हें एजेंसी से बैरंग लौटा दिया गया। बुकिंग के बावजूद बिना गैस दिए डिलीवर्ड कह कर वापस भेजा जा रहा है।उपभोक्ताओं का सीधा और गंभीर आरोप है कि भारत गैस एजेंसी में सिलेंडर की कृत्रिम किल्लत पैदा कर उन्हें अवैध रूप से अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा है, जबकि जायज बुकिंग वालों को टरकाया जा रहा है।जब की जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि जनपद में गैस की कोई किल्लत नहीं है अफवाहों पर ध्यान न दें।लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि गैस की कमी नहीं है तो घर घर,गांव व कस्बों की सप्लाई क्यों बंद है। जब की प्रतिदिन गैस की गाड़ी आती है और कुछ लोगों को बांट के गैस खतम होने की बात कही जाती है।रही बात गैस सिलेंडरों की स्टोर करने की तो जब 25 दिन बाद दूसरा सिलेंडर मिलने का सिस्टम है तो कैसे लोग स्टोर कर लेंगे। कही न कहीं जान बुझ कर ऐसी स्थित उत्पन्न की जारही है।



