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फांसी से चंद घंटे पहले कातिल को किया माफ

सऊदी अरब में यासिर ने किया था अहमद का कत्ल, शरई अदालत में सुनवाई के बाद अमीर ने दिया था फांसी का हुक्म

कानपुर। सऊदी अरब एक इस्लामी मुल्क है। इस मिल्क में वैसे तो राजशाही है लेकिन यहां पर शरीयत का कानून चलता है। इस कानून में मौत का बदला मौत है। हाल ही में एक ऐसा ही वाक्या आया जिसने सारी दुनिया में मिसाल पेश कर दी। फांसी से चंद घंटे पहले ही अपना बेटा खोने वाले बूढ़े बाप ने कातिल युवक के घर जाकर उसे माफ करने का ऐलान कर दिया। इस पर कातिल की बूढ़ी मां ने शुक्रिया अदा किया। इस पर उन्होंने सिर पर बोसा दिया। इसके अलावा घरवालों ने भी रोते हुए उनका शुक्रिया अदा किया।

सऊदी अऱब के असीर इलाके में शेख याहया बिन अल बशरी कहतानी ने अपने बेटे अहमद के कातिल यासिर को फांसी से महज 15 घंटे पहले माफ कर दिया। उन्होंने किसास यानि मौत के बदले पैसा भी नहीं लिया। शेख याहया ने सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए कातिल को माफ करने का फैसला लिया। कत्ल करने वाला यासिर भी अपनी मां का इकलौता बेटा था। वह ही अपनी बीमार मां की देखभाल करता था। यासिर ने किसी बात पर तैश में आकर अहमद पर हमला कर उसका कत्ल कर दिया। पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया। शरई अदालत के अमीर ने फांसी की सजा सुनाते हुए अहमद के पिता से दरख्वास्त की कि किसास यानि बेटे के कत्ल के बदले पैसा लेकर कातिल की जान बख्श दो लेकिन वह तैयार नहीं हुए। फिर फांसी का दिन मुकर्रर हो गया। उधर, कातिल की बहन अहमद के पिता से बराबर फोन पर बात कर माफ करने की मिन्नते मांगती रही।

इसका असर अल्लाह ने अहमद के वालिद पर ऐसा डाला कि वह यासिर के घर पहुंच गए। उनको देखकर घर के सारे लोग इकट्ठा हो गए। शेख याहया ने अपनी डबडबाती हुईं आंखों के साथ कहा कि जाओ तुम्हारे बेटे को माफ कर दिया। यह सुनना था कि कातिल की मां रोते हुए उनसे जाकर लिपट गई। इसके साथ घर के सभी लोगों ने उनको गले लगाकर शक्रिया अदा किया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की काफी चर्चा हो रही है।

 

इस्लाम में मकतूल के परिवार को ही कातिल को माफ करने का अख्तियार है। चाहे तो वह पैसा यानि किसास लेकर माफ कर दे या अल्लाह की रजा के लिए। शरीयत में सभी के लिए एक ही इंसाफ है। इसमें किसी शरई अदालत को कातिल को माफ करने का हक नहीं है। इसीलिए सऊदी अरब में अपराध भी कम हैं। शेख याहया ने कातिल की बूढ़ी मां की खातिर यासिर को माफ कर फांसी से बचा लिया।हाजी मोहम्मद सलीस,  महासचिव,  आल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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