फिदा होने को कासिम रन में दूल्हा बनकर जा पहुंचे …
हजरत कासिम की मेहंदी के जुलूस निकाले गए, चमनगंज से हाजी शेरा का अलम का जुलूस निकला
कानपुर। मोहर्रम की 7 तारीख पर इमाम बारगाहों, मस्जिदों, इमाम चौक और घरों के इमामबाड़ों में हजरत कासिम की मेहंदी सजाई गई। मलीदा और फलों पर फातेहा दिलाया गया। मजलिसों में हज़रत कासिम की शहादत पर रोशनी डाली गई। ग्वालटोली मकबरा इमाम बारगाह आगामीर से नवाब हैदर अली खाँ का 157 साल पुराना हजरत कासिम की मेहंदी का जुलूस या हुसैन की सदाओं के साथ उठाया गया।
जुलूस में अन्जुमने मोहम्मदी मोइनुल अजा के साहबयाज अख्तर सीतापुरी व हसन अब्बास नौहाख्वानी के जरिये हज़रत इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम और कर्बला के 72 शहीदों को खिराजे अकीदत पेश कर रहे थे। जुलूस में नौहों के साथ सीनाजनी की जा रही थी। जुलूस में हज़रत कासिम की मेहंदी का थाल शानदार तरीके से सजा था, जो अकीदतमन्द लेकर चल रहे थे। जुलूस में कई अलम व अमारियों से सजे ऊट भी चल रहे थे। यह जुलूस मकबरा छोटी कर्बला में गश्त के बाद ग्वालटोली बाजार व मछली वाला तिराहा होता हुआ सिविल लाइन्स इमाम बारगाह नवाब हैदर अली खाँ में पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में पुलिस की जबरदस्त समुचित व्यवस्था थी। जुलूस का नेतृत्व नवाब हैदर अब्बास, नवाब अली अब्बास, महामंत्री शंहशाह मिर्जा, निशात अली, ताज मिर्जा, कर रहे थे। जुलूस में डा. जुल्फिकार अली रिजवी, सिकदंर सीतापुरी, फ़ुरकान हैदर रिज़वी, आसिफ अब्बास, नजरे आलम जाफरी, परवेज़ जाफ़री, मुन्तजिर हसन, आसिफ रिजवी चिन्टू, डा. अयाज हैदर, अनवार अहमद सज्जादी और हसनैन अकबर मौजूद थे।

इसी तरह मर्दाना जुलूस उठने के बाद इमाम बारगाह हाजी मुंसिफ़ अली रिज़वी मकबरा से शिया महिलाओं ने अन्जुमने कनीजाने सैय्यदा के तत्वावधान में हजरत इमाम हसन के पुत्र हजरत कासिम की मेहंदी का जुलूस (जिन्होंने कर्बला के मैदान में शहादत दी थी) शानदार तरीके से निकाला। जुलूस में सबसे आगे जलती हुई मोमबत्तियों का थाल था उसके पीछे अलम और हज़रत कासिम की मेहंदी से सजी हुई सीनिया थीं जिसमें मलिदा व फलों से भरे हुए थाल महिलाएं लेकर चल रही थीं। यह जुलूस इमाम बारगाह हाजी मुंसिफ़ अली रिज़वी में वापस पहुंचकर मजलिसे अजा में परिवर्तित हो गया जिसमें जाकिरा डा. सानिया रिज़वी ने हजरत कासिम की शहादत बयान की जिसे सुनकर मजलिस से मौजूद ख्वातीन की आंखें अश्करबार हो गईं। इसके बाद मातम शुरू हुआ। इस मौके पर नसीम रिजवी, शीबा रिजवी, लुबना फ़ातिमा, रूबी मिर्ज़ा ने नौहा ख्वानी की। दूसरी तरफ पटकापुर नवाब साहब का होता महल से अन्जुमन कनीजने जेहरा के तत्वावधान में हजरत कासिम की मेहंदी का जुलूस निकाला गया।
जुलूस में भी महिलाओं के लिए पर्दे की विशेष व्यवस्था थी। इसी तरह नई सड़क से हामिद की मेहंदी का 135 साल पुराना जुलूस देर रात निकाला गया जिसका नेतृत्व मुन्ना खॉ, मो. मंजूर, मो. समी और मो. अकील कर रहे थे। जुलूस में दर्जनों अलम लोग लिए चल रहे थे। 25 ऊँट और घोड़े पर बैठने वाले लोग अरबी लिबास में थेय़ हज़रत कासिम की शहादत की याद में यह शेर पढ़े जा रहे थे-
सबक सबरो रजा का दे गए हैं कर्बला वाले
मुसीबत में हमेशा मुस्कराते हैं खुदा वाले,
फिदा होने को कासिम रन में दुल्हा बनकर जा पहुंचे
सकीना के लिए अब्बास सकका बनकर जा पहुंचे
लोग करते हैं क्यों आहोजारी मां यह कासिम की रोकर पुकारी मेरे कासिम की आती है मेहंदी।
जुलूस में दर्जनों ठेलों से पुलाव, जर्दा और तरह-तरह का तबर्रुक रास्ते भर तकसीम किया जा रहा था। पुलिस प्रशासन सर्तक रहा। यह जुलूस नई सड़क से शेरा बाबू पार्क, मेस्टन रोड, बिसातखाना, मूलगंज, अनवरगंज, फूलवाली गली, इफितखाराबाद, दलेलपुरवा, रूपम चौराहा, हलीम कालेज, चमनगंज, मोहम्मद अली पार्क, कधी मोहाल, बेकनगंज, तलाक महल, दादामियां चौराहा, पेचबाग से वापस नई सड़क से रोटी वाली गली पहुंचकर सुबह तड़के समाप्त हुआ। हाजी शेरा का अलम जुलूस मोहम्मद अली पार्क चमन गंज से उठा। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ वापस चमनगंज में समाप्त हुआ




